अमरावती, 17 अक्टूबर (भाषा) आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रियों के बीच अपने-अपने राज्य में निवेश और कर्ज की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर जुबानी जंग छिड़ गई।
आंध्र के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर हाल ही में एक पोस्ट में कहा था, ”वे कहते हैं कि आंध्र का खाना मसालेदार होता है। लगता है हमारे कुछ निवेश भी मसालेदार हैं। कुछ पड़ोसी पहले से ही इसकी चपेट में हैं!”
लोकेश ने यह भी कहा था कि भारत के उभरते ‘सबसे युवा राज्य’ को सबसे ज्यादा निवेश मिला है।
उन्होंने हाल में विशाखापत्तनम में गूगल के 15 अरब डॉलर के एआई डेटा सेंटर निवेश की प्रतिबद्धता का जिक्र किया, जिस पर नयी दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे।
पड़ोसी राज्य कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए एक्स पर कहा, ”हर कोई अपने खाने में थोड़ा मसाला पसंद करता है, लेकिन जिस तरह पोषण विशेषज्ञ संतुलित आहार की सलाह देते हैं, उसी तरह अर्थशास्त्री भी संतुलित बजट की वकालत करते हैं। पड़ोसी राज्य की कुल देनदारियां अब लगभग 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं।”
कांग्रेस-शासित कर्नाटक के आईटी मंत्री ने कहा कि एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली आंध्र सरकार ने सिर्फ एक साल में 1.61 लाख करोड़ रुपये उधार लिए हैं।
इसके अलावा, खरगे ने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश का राजस्व घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के मुकाबले ‘बदतर’ होकर 2.6 प्रतिशत से बढ़कर 3.6 प्रतिशत हो गया है।
खरगे ने एक टीवी ब्रांड के पुराने विज्ञापन का हवाला देते हुए कहा, ”कुछ भी कहा और किया जाए, हम हमेशा रहेंगे: पड़ोसी की ईर्ष्या और मालिक का अभिमान।”
दोनों राज्यों के मंत्री इस मुद्दे पर पहले भी एक-दूसरे पर निशाना साध चुके हैं। हाल ही में लोकेश ने बुनियादी ढांचे से असंतुष्ट बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप और कंपनियों को आंध्र प्रदेश में लाने की कोशिश की थी। खरगे ने इन प्रयासों की आलोचना की थी।
लॉजिस्टिक स्टार्टअप ब्लैकबक के राजेश याबाजी ने हाल में एक पोस्ट में कहा था कि बेंगलुरु के बेलंदूर से काम करना ‘बहुत मुश्किल’ हो रहा है, तो लोकेश ने उन्हें विशाखापत्तनम आने का न्योता दिया।
भाषा पाण्डेय रमण प्रेम
प्रेम
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.