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Monday, 6 July, 2026
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सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पर अमित शाह का कांग्रेस पर निशाना— ‘मोदी सरकार ने दी नई दिशा’

पांचवें स्थापना दिवस के मौके पर शाह ने केंद्र के कोऑपरेटिव सुधारों पर रोशनी डाली, और भारत टैक्सी के विस्तार और एक नई इंश्योरेंस कोऑपरेटिव के साथ मंत्रालय के भविष्य के रोडमैप के बारे में बताया.

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सहकारिता क्षेत्र को कई दशकों तक नजरअंदाज किया गया और इसे नई रफ्तार तभी मिली जब नरेंद्र मोदी सरकार ने 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय बनाया.

मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए शाह ने कहा कि पहले सहकारिता क्षेत्र को दूसरे दर्जे का माना जाता था, लेकिन मंत्रालय बनने के बाद इसे नई दिशा मिली है. उन्होंने कहा, “पहले सहकारिता क्षेत्र को दूसरे दर्जे का माना जाता था, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने अलग मंत्रालय बनाकर इसे नई दिशा दी है.”

उन्होंने इसे सहकारिता आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण दिन बताया और कहा कि आज देश में 8.5 लाख से ज्यादा सहकारी समितियां हैं, जिनसे 32 करोड़ से ज्यादा सदस्य जुड़े हुए हैं.

2021 में मंत्रालय बनने की बात याद करते हुए शाह ने कहा कि शुरुआत में इसकी काफी आलोचना हुई थी. लोगों को डर था कि केंद्र सरकार राज्यों के अधिकार वाले विषय में दखल देगी. शाह ने कहा, “मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं जिन्होंने अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने का विरोध किया था कि पिछले पांच साल में विपक्ष की सरकार वाले किसी भी राज्य ने केंद्र सरकार की किसी भी नीति पर सवाल नहीं उठाया.”

पिछले पांच साल के काम की समीक्षा करते हुए शाह ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कई सुधार किए गए. उन्होंने कहा, “पिछले पांच साल में हमने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. हमने सहकारिता व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक से जुड़ा और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में सराहनीय काम किया है.”

उन्होंने कहा कि पहले सहकारिता आंदोलन ज्यादातर कृषि ऋण, डेयरी, खाद वितरण और ग्रामीण सेवाओं तक सीमित था. लेकिन अब इसका विस्तार दूसरे और तीसरे स्तर के क्षेत्रों तक हो गया है. शाह के मुताबिक, 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सहकारिता क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि पिछले पांच साल में उनका मुनाफा लगभग दोगुना हो गया है. वहीं सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA) 12.8 प्रतिशत से घटकर 6.2 प्रतिशत हो गई हैं और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NNPA) 6 प्रतिशत से घटकर 0.7 प्रतिशत रह गई हैं.

GNPA का मतलब है कि बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज में कितना हिस्सा खराब कर्ज बन चुका है. जबकि NNPA वह हिस्सा होता है जो संभावित नुकसान के लिए प्रावधान करने के बाद बचता है.

सहकारी संस्थाओं में पेशेवर प्रबंधन की जरूरत पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि गुजरात के आनंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय बनने से सहकारिता क्षेत्र के लिए पेशेवर लोगों को तैयार किया जाएगा. उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि प्राथमिक सहकारी समितियों से लेकर सबसे बड़ी संस्थाओं तक चरणबद्ध तरीके से पेशेवर प्रबंधन लागू किया जाए. इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी, काम की क्षमता बेहतर होगी और नियुक्तियों में होने वाले भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी रोक लगेगी.”

उन्होंने यह भी कहा कि BJP की सरकारों ने हमेशा समाज कल्याण के लिए नई संस्थाएं बनाई हैं. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय जनजातीय कार्य मंत्रालय और 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय बनने का उदाहरण दिया.

आगे की योजना

मंत्रालय की आगे की योजना बताते हुए शाह ने कहा कि अगले दो साल में भारत टैक्सी सेवा का विस्तार सभी राज्यों के 500 शहरों और कस्बों तक किया जाएगा.

उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही एक नई जीवन बीमा सहकारी समिति शुरू की जाएगी. इसका उद्देश्य IFFCO-Tokio General Insurance Company के साथ मिलकर सहकारी नेटवर्क के जरिए बीमा सेवाओं का विस्तार करना है.

शाह ने कहा कि 2023 में बनाई गई बहु-राज्य सहकारी संस्था भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) अगले तीन साल में भारत की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यह संस्था किसानों को शुद्ध और बिना मिलावट वाले बीज उपलब्ध कराएगी, अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों का वितरण करेगी और भारत के पारंपरिक बीजों के संरक्षण में भी मदद करेगी.

स्थापना दिवस समारोह के दौरान डेयरी सहकारी समितियों के लिए मॉडल उपनियम भी जारी किए गए. साथ ही पिछले पांच साल में मंत्रालय की उपलब्धियों पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन भी जारी किया गया.

कार्यक्रम में BBSSL और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए, ताकि भारत की बीज व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके. एक और महत्वपूर्ण घोषणा यह रही कि सरकार की जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने की योजना के तहत 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को ई-PACS में बदला जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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