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Sunday, 26 April, 2026
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भारतीय कार्यबल का 30 प्रतिशत सेवा क्षेत्र में, वैश्विक औसत से कम: नीति रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि भारत का सेवा क्षेत्र देश के लगभग 30 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है, जो धीमे संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है। यह आंकड़ा अभी भी वैश्विक औसत 50 प्रतिशत से कम है।

आयोग ने ‘भारत का सेवा क्षेत्र: रोजगार के रुझान और राज्य-स्तरीय गतिशीलता से मिली अंतर्दृष्टि’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में कहा कि सेवाएं भारत की रोजगार वृद्धि और महामारी के बाद सुधार का मुख्य आधार बनी हुई हैं।

आयोग ने कहा, ‘‘सेवा क्षेत्र में रोजगार 2011-12 के 26.9 प्रतिशत की तुलना में 2023-24 में बढ़कर 29.7 प्रतिशत हो गया और पिछले छह वर्षों में चार करोड़ नौकरियों का सृजन हुआ।’’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘हालांकि, यह अभी भी वैश्विक औसत 50 प्रतिशत से पीछे है, जो धीमे संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।’’

रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए संरचनात्मक सुधारों, सामाजिक सुरक्षा में तेजी लाने, अनौपचारिक श्रमिक पंजीकरण के डिजिटलीकरण और देखभाल सेवाओं को औपचारिक बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि जहां सेवा क्षेत्र राष्ट्रीय उत्पादन में आधे से ज्यादा का योगदान देता है, वहीं ये एक-तिहाई से भी कम नौकरियां देता है, जिनमें से ज्यादातर असंगठित और कम वेतन वाली हैं।

इसमें कहा गया, ‘‘वृद्धि और रोजगार के बीच यह अंतर भारत के सेवा-आधारित विकास के लिए मुख्य चुनौती है।’’

इसमें कहा गया कि 60 प्रतिशत से ज्यादा शहरी श्रमिक सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 20 प्रतिशत से भी कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र में स्त्री-पुरुष भेद अभी भी स्पष्ट है और केवल 10.5 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं ही सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं। शहरों में महिलाएं सेवा क्षेत्र में 60 प्रतिशत हैं, और उनकी भागीदारी काफी हद तक कम-मूल्य वाली गतिविधियों तक ही सीमित है।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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