नई दिल्ली: उत्तराखंड में 2022 में एक रिसॉर्ट में 19 साल की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी. गुरुवार सुबह दिल्ली पुलिस ने उनके माता-पिता को हिरासत में ले लिया था. वे बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. कुछ घंटों बाद, सुबह-सुबह उन्हें छोड़ दिया गया. परिवार ने आरोप लगाया है कि अंकिता की मौत से जुड़ी परिस्थितियों में गौतम की भूमिका थी.
अंकिता के माता-पिता को सुबह करीब 3:45 बजे इंडिया गेट पर हिरासत में लिया गया था. उनके साथ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, जोथिमणि और आर. सुधा के अलावा सुप्रिया श्रीनेत, उदय भानु चिब, विनोद जाखड़ और वरुण चौधरी को भी हिरासत में लिया गया था. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द प्रिंट को बताया कि सभी को सुबह करीब 5 बजे छोड़ दिया गया.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सुबह-सुबह पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने X पर लिखा, “जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया.”
सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया।
उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे – बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।… pic.twitter.com/XkqNGsZ7F3
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 15, 2026
बुधवार को अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने मांग की थी कि दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक अंकिता की मौत में गौतम और बीजेपी के अन्य नेताओं की कथित भूमिका की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी नहीं हो जाती.
उन्होंने मीडिया से कहा, “हम सरकार को दुष्यंत की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दे रहे हैं. अगर सरकार हमारी मांग नहीं मानती है, तो देशभर में प्रदर्शन शुरूकिए जाएंगे.”
कांग्रेस ने परिवार की मांग का समर्थन किया
राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता के साथ शामिल हुए. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग की.
राहुल गांधी ने X पर लिखा, “चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय नहीं मिला है, लेकिन एक ‘VIP’ आरोपी को सुरक्षा और संवैधानिक पद जरूर मिल गया है.”
उन्होंने आगे कहा, “जहां बलात्कारियों और हत्यारों का स्वागत फूलों की माला पहनाकर किया जाता है और अपराधियों को सत्ता का सम्मान दिया जाता है, वहां ऐसी महिला विरोधी बीजेपी से किसी भी तरह की उम्मीद नहीं की जा सकती.”
उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने के लिए घर से काफी दूर इंडिया गेट आए थे. उन्होंने कहा कि वह और कांग्रेस पार्टी न्याय की इस लड़ाई में परिवार के साथ खड़े हैं.
कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने भी राष्ट्रपति से गौतम की नियुक्ति रद्द करने की अपील की. उन्होंने परिवार की मांग को “पूरी तरह जायज” बताया.
वहीं, बीजेपी ने अंकिता के मामले में उत्तराखंड सरकार के काम का बचाव किया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार ने अंकिता को न्याय दिलाने के लिए कई कदम उठाए हैं.
भट्ट ने कहा, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस मामले में कई अहम कदम उठाए. इनमें आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करना, विशेष जांच दल (SIT) का गठन करना, प्रभावी तरीके से मुकदमा चलाना और पीड़िता के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद देना शामिल है.”
उन्होंने आगे कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग के बाद धामी ने CBI जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी. उन्होंने कहा, “सरकार ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लिया और परिवार की मांगों पर उचित ध्यान दिया.”
अंकिता भंडारी मामला क्या है?
19 साल की अंकिता उत्तराखंड के पौड़ी जिले में ऋषिकेश के पास स्थित वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं. 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी. छह दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था.
मई 2025 में कोटद्वार की एक सेशन कोर्ट ने रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो बीजेपी के पूर्व नेता विनोद आर्य के बेटे हैं, और रिसॉर्ट के दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अंकिता की हत्या का दोषी ठहराया. तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
दिसंबर 2025 में यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से कथित तौर पर जारी किए गए कुछ ऑडियो क्लिप सामने आए. इन रिकॉर्डिंग में बीजेपी से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर कथित तौर पर एक “VIP” का जिक्र करते हुए सुनाई दे रहे थे. सनावर ने उस VIP की पहचान गौतम के रूप में की थी. उस समय गौतम बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के प्रभारी थे.
सनावर ने तत्कालीन बीजेपी उत्तराखंड महासचिव (संगठन) अजय कुमार का नाम भी उन आरोपों के संबंध में लिया, जिनमें कहा गया था कि अंकिता पर “अतिरिक्त सेवाएं” देने का दबाव बनाया गया था.
बाद में राठौर ने दावा किया कि ये ऑडियो क्लिप फर्जी हैं. गौतम ने राठौर और सनावर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया. सनावर का दावा है कि वह राठौर की दूसरी पत्नी हैं.
अंकिता के माता-पिता लगातार मामले में कथित VIP की भूमिका की जांच कराने की मांग कर रहे हैं. नए सिरे से हुए प्रदर्शनों के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी साल 7 जनवरी को उनसे मुलाकात की थी. इसके बाद CBI जांच के आदेश दिए गए.
परिवार ने यह भी मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट का कोई मौजूदा जज जांच की निगरानी करे. उनकी अन्य मांगों में कथित VIP की पहचान उजागर करना और दोषी ठहराए गए तीनों लोगों तथा रिकॉर्डिंग में नाम लिए गए VIP से जुड़े कॉल डिटेल रिकॉर्ड जारी करना शामिल है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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