नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसरों को सेवानिवृत्ति के बाद पांच साल का विस्तार मिल सकता है। विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय निर्धारण संस्था ने ‘‘अनुसंधान-उन्मुख शिक्षाविदों’’ को फिर से नौकरी देने के लिए सोमवार को दिशा निर्देश पारित किए।
कार्यकारी परिषद ने अपनी बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया। अधिकारियों ने कहा कि इससे विश्वविद्यालय में अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
संकाय सदस्य की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 साल है और अभी तक शिक्षकों को कोई सेवा विस्तार नहीं दिया गया है।
कुलपति योगेश सिंह की अध्यक्षता में नए वित्त वर्ष की पहली बैठक में 2023-24 के लिए विश्वविद्यालय के 1,886.53 करोड़ रुपये का बजट भी पारित कर दिया गया।
विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों में अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने तथा अनुसंधान उन्मुख शिक्षाविदों को पुन: नौकरी देने के लिए दिशा निर्देश बनाने के वास्ते गठित समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद इस बैठक में ये सिफारिशें भी पारित की गयी।’’
पुन: नौकरी देने का नियम केवल विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों, केंद्रों और स्कूलों तथा दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित संस्थानों में लागू होगा न कि कॉलेजों में।
दिशा निर्देशों में कहा गया है कि जिस प्रोफेसर को सेवा विस्तार दिया जाएगा वह किसी प्रशासनिक पद पर नहीं होगा और उसे दी जाने वाली वित्तीय शक्ति भी सीमित होगी।
इसमें कहा गया है, ‘‘कोई भी शिक्षक 70 साल का होने के बाद फिर से नौकरी में बना नहीं रहेगा। सेवा विस्तार पाने वाली प्रोफेसर/वरिष्ठ प्रोफेसर को विभाग में एक कार्यालय दिया जाएगा और अगर जरूरत पड़ी तो वह अन्य फैकल्टी के साथ प्रयोगशाला भी साझा कर सकेंगे।’’
बैठक में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 1,886.53 करोड़ रुपये के कुल बजट का अनुमान जताया गया है।
भाषा
गोला माधव
माधव
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