चेन्नई, एक जुलाई (भाषा) तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने शनिवार को यहां कहा कि सनातन धर्म में भेदभाव या अस्पृश्यता का कोई स्थान नहीं है तथा विसंगतियां इस प्राचीन धर्म की मूलभूत विशेषताओं को परिभाषित नहीं कर सकतीं जो लोगों को एक परिवार के रूप में एकजुट करने के बारे में है।
यहां एक मठ के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने संबोधन में रवि ने श्री आदि शंकराचार्य, श्री रामानुजाचार्य, श्री माधवाचार्य, श्री राघवेंद्र स्वामी और नायनमार तथा आलवार जैसे भारतीय संतों की वंशावली का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘कहीं कोई भेदभाव नहीं है। ऐसे संत समानता के लिए खड़े थे।’’
राज्यपाल ने कहा, ‘कुछ लोग अज्ञानतावश यह कहने का प्रयास करते हैं कि सनातन धर्म में भेदभाव है; छुआछूत है, नहीं, यह नहीं है। मनुष्यों के बीच भेदभाव सनातन धर्म में नहीं है और छुआछूत का सनातन धर्म में कोई स्थान नहीं है।’
भाषा नेत्रपाल माधव
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