नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी विमानन कंपनियों के पायलट की मादक पदार्थ संबंधी जांच कराने के आदेश दिए हैं और कंपनियों को जुलाई 2027 तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू करने को कहा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
इससे इतर, नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने बृहस्पतिवार को कहा कि पायलटों की मादक पदार्थ संबंधी जांच के नए नियमों के मसौदे को डीजीसीए द्वारा इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दिया जा सकता है।
यह कदम एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड की जांच में उसके मादक पदार्थ संबंधी सेवन की पुष्टि होने के बाद उठाया गया है। चार अगस्त को हुई इस घटना के दौरान विमान अचानक करीब 300 फुट नीचे आ गया था, जिससे कई यात्री घायल हो गए थे।
चार सितंबर को जांच एजेंसी ‘वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो’ (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में फुकेत उड़ान की घटना के दौरान पायलट द्वारा मादक पदार्थों के सेवन की पुष्टि को गंभीर चिंता का विषय बताए जाने और डीजीसीए से उचित कार्रवाई करने की सिफारिश किए जाने के कुछ ही घंटे बाद एअर इंडिया ने पायलट-इन-कमांड को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि डीजीसीए ने पिछले माह सभी विमानन कंपनियों के पायलट की मादक पदार्थ संबंधी जांच कराने का आदेश दिया और कंपनियों से अगले साल जुलाई तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू करने के लिए कहा गया।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक सम्मेलन से इतर नायडू ने बृहस्पतिवार को कहा कि संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के बाद मन:प्रभावी पदार्थों की जांच से जुड़े संशोधित ‘नागर विमानन आवश्यकता’ (सीएआर) के मसौदे को इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दिया जा सकता है।
फिलहाल पायलट की मादक पदार्थ संबंधी जांच बिना पूर्व सूचना के की जाती है। डीजीसीए के मौजूदा सीएआर के तहत हर साल पायलटों और हवाई यातायात नियंत्रकों समेत अन्य संबंधित कर्मचारियों में से 10 प्रतिशत की मादक पदार्थ संबंधी जांच बिना पूर्व सूचना के करना अनिवार्य है।
विभिन्न वाणिज्यिक विमानन कंपनियों में 12,000 से अधिक पायलट कार्यरत हैं।
भाषा खारी सुरेश
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