नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर जारी छात्र प्रदर्शन के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में 10 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की हैं. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है. इन कंपनियों को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के चार जिलों से लाया गया है और रायपुर से एयरलिफ्ट कर दिल्ली पहुंचाया गया.
यह तैनाती ऐसे दिन हुई है, जब CJP और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका. सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका से बातचीत की.
सूत्रों के मुताबिक, नई तैनाती के बाद राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की कुल 55 कंपनियां तैनात हैं. इनमें सबसे ज्यादा 34 कंपनियां CRPF की हैं.
इस सप्ताह की शुरुआत में, गृह मंत्रालय ने दिल्ली में CAPF की 30 अतिरिक्त कंपनियां भेजने का आदेश दिया था. यह फैसला CJP के नेतृत्व वाले ‘चलो संसद’ मार्च पर सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई के कुछ घंटों बाद लिया गया. इस कार्रवाई में दिल्ली पुलिस और CRPF की दंगा-रोधी इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) भी शामिल थी.
बल के सूत्रों ने बताया कि एयरलिफ्ट की गई इन 10 कंपनियों के सभी जवानों को दिल्ली में तैनात कर दिया गया है और कंपनी कमांडरों को अपनी-अपनी कंपनियों को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं.
तैनाती आदेश से जुड़े एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “कंपनियों को पूरी ऑपरेशनल क्षमता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्हें अत्याधुनिक दंगा-रोधी उपकरण, ऑपरेशनल स्तर के हथियार, गोला-बारूद और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी सभी उपकरणों से लैस किया गया है.”
अधिकारी ने आगे कहा, “तैनाती से पहले सभी जवानों को सुरक्षा उपायों, अनुशासन और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की पूरी जानकारी दी जाएगी. उन्हें पिछले साल अक्टूबर में बल मुख्यालय द्वारा जारी किए गए संशोधित ऑपरेशनल दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है.”
नई तैनाती के बाद राष्ट्रीय राजधानी में CRPF की 34 कंपनियां, उसकी दंगा-रोधी इकाई RAF की 15 कंपनियां, सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 3 कंपनियां, सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 2 कंपनियां और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 1 कंपनी तैनात है.
दो घंटे से अधिक चली CJP और सरकार के बीच दूसरी दौर की बातचीत के बाद CJP के आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने सैद्धांतिक रूप से दो मांगें मान ली हैं—नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और सोमवार के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दर्ज FIR वापस लेना.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग, यानी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें हटाने के मुद्दे पर रांका ने कहा कि मंत्रियों ने शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है.
CJP और सरकार के बीच शनिवार को दिल्ली में बातचीत का अगला दौर आयोजित करने पर सहमति बनी है.
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