नयी दिल्ली, छह नवंबर (भाषा) दिल्ली में वायु प्रदूषण से परेशान लोगों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने शुक्रवार को सरकार से इस समस्या से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदूषण की समस्या को दूर करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से बच रही है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक बैठक में वक्ताओं ने राजधानी में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकारी प्रदूषण के प्रमुख कारणों पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी से बचने पर ध्यान दे रहे हैं।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन (आईसा) की अध्यक्ष नेहा ने कहा, “दिल्ली की हवा ठीक करो, वरना लोग सड़कों पर उतरेंगे।”
उन्होंने कहा कि प्रदूषण का संकट लोगों के स्वास्थ्य और सामाजिक समानता से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन खंडारी ने आरोप लगाया कि नीतियों में ताप बिजली घरों में सल्फर हटाने की व्यवस्था (डिसल्फराइजेशन) की जरूरत को नजरअंदाज किया गया है। साथ ही, कचरे से बिजली बनाने वाले संयंत्रों से होने वाले प्रदूषण पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अधिकारी आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं, जबकि बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जवाबदेही तय करने में नाकाम हैं।
पर्यावरण शोधकर्ता और कार्यकर्ता सौत्रिक गोस्वामी ने कहा कि वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं दिल्ली में खराब हवा के प्रमुख कारणों में शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें लगातार प्रदूषण का ठीकरा पड़ोसी राज्यों के किसानों पर फोड़ रही हैं।
जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की उपाध्यक्ष के गोपिका बाबू ने सवाल उठाया कि क्या साफ हवा में सांस लेना अब एक विशेषाधिकार बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एयर प्यूरीफायर, घर से काम करने और ऑनलाइन कक्षाओं जैसे उपाय हर किसी की पहुंच में नहीं हैं।
उन्होंने कहा, ‘हमारे शहर में साफ हवा में सांस लेना कोई विलासिता नहीं बनना चाहिए।’
बैठक का संचालन एआईएसए नेता अंजलि ने किया। उन्होंने प्रदूषण के संकट को राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बुरा असर मजदूर और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है।
शुक्रवार को राजधानी दिल्ली पर धुंध की मोटी चादर छाई रही। हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब हुई और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 391 पर पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी के करीब है।
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के अनुसार, शुक्रवार को इस मौसम में पहली बार दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच सकती है। अनुमान है कि 8 नवंबर यानी दिवाली तक स्थिति ऐसी ही बनी रह सकती है।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश
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