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Wednesday, 30 September, 2026
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महिलाओं की सुरक्षा पर दिल्ली HC का Uber, Ola और Rapido को नोटिस, 16 दिसंबर को अगली सुनवाई

ऐप से चलने वाली टैक्सी और राइड सेवाओं में महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत इंतजाम की मांग वाली PIL पर केंद्र और दिल्ली सरकार को भी नोटिस.

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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत इंतजाम की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर कैब बुकिंग प्लेटफॉर्म Uber, Ola और Rapido के साथ-साथ केंद्र और दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया.

यह याचिका ऐप के जरिए चलने वाली टैक्सी और राइड-हेलिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को मजबूत करने की मांग को लेकर दायर की गई है.

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने संबंधित पक्षों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को तय की.

अदालत ने कहा कि वह टैक्सी ऐप चलाने वाली निजी कंपनियों को यात्रियों की सुरक्षा के लिए दिए गए इंतजामों के लिए जवाबदेह बनाना चाहती है. बेंच ने कहा, “हम टैक्सी ऐप चलाने वाली निजी कंपनियों को जवाबदेह बनाना चाहते हैं. यही वजह है कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं.”

अदालत ने ये निर्देश आदित्य सहगल की ओर से दायर PIL पर सुनवाई करते हुए दिए. याचिका में ऐप से चलने वाली कैब, बाइक टैक्सी और दूसरी राइड-हेलिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग की गई है.

सुनवाई के दौरान सहगल की ओर से पेश वकील ने कहा कि ऐप से चलने वाली कंपनियां दिल्ली-NCR क्षेत्र में दो लाख से ज्यादा कैब चलाती हैं. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि रात के समय ड्राइवरों की पर्याप्त जांच नहीं होती.

वकील ने कहा कि रात 8 या 9 बजे के बाद यह पता लगाने के लिए ड्राइवरों की कोई जांच नहीं होती कि वे एयरपोर्ट या दूसरी महत्वपूर्ण जगहों पर गाड़ी चला रहे हैं या नहीं और कहीं उन्होंने शराब तो नहीं पी रखी है.

PIL में ड्राइवरों की जांच और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच, ड्राइवर और गाड़ी की पहचान, रास्ता बदलने, आपात स्थिति में मदद, शिकायतों के समाधान और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच तालमेल से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं.

याचिकाकर्ता की ओर से वकील विकास गुप्ता, आदित्य सहगल, कौशिक आनंद और सोहिल शर्मा पेश हुए.

याचिका में निर्देश देने की मांग की गई है कि जिस ड्राइवर और वाहन से राइड पूरी की जा रही है, उसकी जानकारी ऐप पर दिखाई गई जानकारी से मेल खानी चाहिए.

याचिका में यह भी मांग की गई है कि अगर बिना अनुमति ड्राइवर या वाहन बदल दिया जाता है, तो यात्री बिना किसी जुर्माने के राइड कैंसिल कर सकें. ऐसे मामलों को सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए.

याचिकाकर्ता ने SOS अलर्ट का जवाब देने के लिए 24 घंटे और सातों दिन चलने वाले कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाने की भी मांग की है.

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बुकिंग की जानकारी, ड्राइवर की पहचान, वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और रियल टाइम लोकेशन आपातकालीन मदद करने वाली टीमों और पुलिस के साथ साझा की जा सकेगी. यह लागू कानून और निजता से जुड़े सुरक्षा उपायों के अधीन होगा.

PIL में रास्ते में बड़े या बिना किसी वजह के बदलाव होने पर अपने आप अलर्ट भेजने, ड्राइवरों को समय-समय पर जेंडर संवेदनशीलता की ट्रेनिंग देने और कमजोर व सुनसान जगहों पर निगरानी की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है.

याचिका में सत्यापित महिला ड्राइवरों का एक पूल बनाने का भी प्रस्ताव है. इसमें अकेले सफर करने वाली महिलाओं को उपलब्धता और संचालन की व्यवहारिकता के आधार पर महिला ड्राइवर को चुनने या प्राथमिकता से महिला ड्राइवर दिए जाने का विकल्प देने की बात कही गई है.

याचिका में ड्राइवर के गलत व्यवहार, उत्पीड़न, हमला, रास्ता बदलने, बिना अनुमति ड्राइवर या वाहन बदलने और आपातकालीन मदद की व्यवस्था काम न करने से जुड़ी शिकायतों के लिए समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था की मांग की गई है.

इसमें ऐप आधारित कंपनियों की ओर से समय-समय पर नियमों के पालन की रिपोर्ट देने और दिल्ली में काम करने वाले सभी प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों को एक समान तरीके से लागू करने की भी मांग की गई है.

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