नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के एक मामले की जांच में कई खामियों का हवाला देते हुए दो व्यक्तियों को आरोप मुक्त करने के फैसले को बरकरार रखते हुए टिप्पणी की कि इस मामले में ‘आरोपियों पर नहीं बल्कि पुलिस की कहानी पर गंभीर संदेह है’।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी दिल्ली पुलिस द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें सुनवाई अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें अजय और गौरव पंचाल को तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में आरोप मुक्त कर दिया गया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आदेश में कहा, ‘‘यह न्यायालय विद्वान सुनवाई अदालत की टिप्पणियों से पूरी तरह सहमत है कि यदि सभी तथ्यों को एक साथ देखा जाए, तो अभियोजन पक्ष की सामग्री पर उसके मूल रूप में विश्वास करना मुश्किल है।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अदालत यहां यह जोड़ना चाहेगी कि कानून का सुस्थापित सिद्धांत यह है कि किसी आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आरोप पर विचार करते समय, न केवल संदेह बल्कि उसके खिलाफ गंभीर संदेह होना चाहिए, लेकिन इस मामले में संदेह या गंभीर संदेह वास्तव में आरोपी पर नहीं बल्कि पुलिस की कहानी पर है।’’
भाषा धीरज रंजन
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