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Saturday, 7 March, 2026
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दिल्ली: अदालत ने 1999 में छत गिरने के मामले में आरोपी को बरी किया

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नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 27 साल पहले छत गिरने की घटना में लापरवाही के आरोपी एक व्यक्ति को बरी कर दिया।

इस घटना में एक मजदूर की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।

यह मामला 16 सितंबर, 1999 का है।

पुलिस को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर इलाके की अर्जुन गली में एक घर की छत गिरने की सूचना मिली थी।

उस घर में निर्माण कार्य चल रहा था और कई मजदूर काम कर रहे थे। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पंकज राय भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 288, 304ए, 337 और 338 के तहत शिव दत्त के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे।

अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ सबूतों को साबित करने में विफल रहा।

अदालत ने 20 फरवरी के एक आदेश में कहा, “यह साबित नहीं किया जा सका कि घटना आरोपी की लापरवाही के कारण हुई। रिकॉर्ड पर मौजूद कोई भी तथ्य यह नहीं दर्शाता कि व्यक्ति की मौत या घायलों को लगी चोटें आरोपी की लापरवाही के कारण थीं।”

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जब पहली मंजिल की छत अचानक गिर गई तो लगभग 15-20 मजदूर वहां मौजूद थे, जो मलबे के नीचे दब गए।

पुलिस ने बताया कि घायल मजदूरों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनमें से एक वाहिद की मौत हो गयी जबकि सात अन्य इस घटना में घायल हुए थे।

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि भवन के मालिक शिव दत्त ने शहजाद नाम के ठेकेदार को निर्माण कार्य सौंपा था, जिसकी मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।

अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि यह घटना आरोपी की किसी लापरवाही या जल्दबाजी के कारण हुई थी।

अदालत ने पाया कि महत्वपूर्ण साक्ष्यों का अभाव था और मुकदमे के दौरान एक गवाह मुकर गया था।

अदालत ने कहा, “अगर ठेकेदार की कोई लापरवाही या जल्दबाजी थी भी, तो उसके लिए आरोपी शिव दत्त को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले में आरोपित अन्य अपराधों की तरह, इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं है कि आरोपी शिव दत्त और सह-आरोपी शहजाद (जिसकी मौत हो चुकी है) की इस अपराध को अंजाम देने में कोई मिलीभगत थी।”

अदालत ने माना कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि मजदूर की मौत या अन्य लोगों को लगी चोटें आरोपी की लापरवाही का नतीजा थीं।

अदालत ने कहा, “उपरोक्त दलीलों के मद्देनजर आरोपी शिव दत्त को आईपीसी की धारा 304ए, 288, 337, 338 और 34 के तहत लगाए गए आरोपों से बरी किया जाता है।”

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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