scorecardresearch
Monday, 27 April, 2026
होमदेशभारत में पीएम2.5 प्रदूषण से होने वाली मौतों में दो दशकों में 2.5 गुना वृद्धि: रिपोर्ट

भारत में पीएम2.5 प्रदूषण से होने वाली मौतों में दो दशकों में 2.5 गुना वृद्धि: रिपोर्ट

Text Size:

नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) पिछले दो दशकों में भारत में पीएम2.5 प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों में 2.5 गुना वृद्धि हुई है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक नयी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में वायु प्रदूषण के कारण हर चार में से एक मौत भारत में हुई।

पर्यावरण क्षेत्र के थिंक टैंक सीएसई द्वारा एकत्र किए गए आंकड़े, और इसकी ‘‘भारत की पर्यावरण रिपोर्ट की स्थिति’’ में दिखाया गया कि दुनिया में वायु प्रदूषण के कारण 66.7 लाख लोग मारे गए। इनमें से 16.7 लाख मौतें भारत में हुईं। चीन में वायु प्रदूषण के कारण 18.5 लाख लोगों की मौत हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में वायु प्रदूषण के जोखिम से जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों के कारण वैश्विक स्तर पर 4,76,000 बच्चों की मृत्यु हुई। इन बच्चों की उम्र एक महीने तक थी। इनमें से 1,16,000 बच्चों की मौत भारत में हुई।

खराब वायु गुणवत्ता, वर्ष 2019 में दुनिया भर में समय से पहले मौत का चौथा प्रमुख कारक थी। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘पिछले दो दशकों में भारत में हवा में मौजूद पीएम2.5 के कारण होने वाली मौतों में 2.5 गुना वृद्धि हुई है। यह 1990 में 2,79,500 से बढ़कर 2019 में 9,79,900 हो गई।’’

पीएम2.5 का मतलब अति सूक्ष्म कणों से है जो शरीर में भीतर तक प्रवेश करते हैं और फेफड़ों तथा श्वसन पथ में सूजन को बढ़ावा देते हैं, जिससे कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली सहित हृदय और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा होता है। हालांकि, आंकड़ों से पता चलता है कि देश में घरेलू स्तर पर वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों में 40 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है जो 1990 में 10,41,000 से 2019 में 6,06,900 हो गईं।

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments