नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की भूमिका की समीक्षा कर रही संसद की एक स्थायी समिति ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा रद्द होने के मद्देनजर एजेंसी की संसद के दोनों सदनों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विधायी तंत्र बनाने की सिफारिश की है।
शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार को पेश अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कहा कि एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में विश्वास बनाए रखना सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता का विषय है।
समिति ने कहा, ”शिक्षा विभाग को ऐसा उपयुक्त संसदीय ढांचा पेश करना चाहिए, जो संसद के प्रति एनटीए की जवाबदेही सुनिश्चित करे।”
समिति ने एनटीए द्वारा अतीत में सुधार के लिए किए गए प्रयासों को स्वीकार करते हुए कहा कि नीट-यूजी 2026 की परीक्षा रद्द होने से संकेत मिलता है कि एजेंसी को अभी और सुधार करने की आवश्यकता है।
एनटीए ने प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच तीन मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 12 मई को रद्द कर दी थी।
समिति ने कहा, ”परीक्षा में धोखाधड़ी कर कमाई करने वाले संगठित गिरोह चीजों को अपने हिसाब से करने में सक्षम और संसाधन संपन्न होते हैं तथा वे हमेशा व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी को निशाना बनाने की कोशिश करेंगे। इसलिए एनटीए को पर्याप्त कर्मचारियों, मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल, स्पष्ट जवाबदेही तंत्र और संचालन एवं परीक्षाओं के डिजिटलीकरण की आवश्यकता है, ताकि वह किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहे।”
समिति ने प्रमुख सुधारों के तहत कलम-कागज के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) प्रणाली अपनाने, प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए सरकार के स्वामित्व और संचालन वाले केंद्रों को शामिल करने तथा निजी केंद्रों पर निर्भरता कम करने का सुझाव दिया।
समिति ने प्रश्न बैंक का व्यापक विस्तार करने की भी सिफारिश की। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर देर से पहुंचने वाले विद्यार्थियों को लिखित वचन देने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का सुझाव दिया।
समिति ने कहा, ”प्रश्नपत्र लीक होने से दीर्घकालिक रूप से बचाव के लिए प्रश्न बैंकों में निवेश सबसे व्यावहारिक उपाय है। एक ही प्रश्न समूह का बार-बार इस्तेमाल करना या हर साल परीक्षकों से नए प्रश्नपत्र तैयार करवाने की प्रथा परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
समिति का मानना था कि एनटीए को एक बड़े, विविधतापूर्ण और लगातार अद्यतन किए जाने वाले प्रश्न बैंक के निर्माण में निवेश करना चाहिए, जिससे प्रश्नपत्र तैयार किए जा सकें और प्रश्न तैयार करने वालों को पहले से यह जानकारी न हो कि परीक्षा में कौन से प्रश्न पूछे जाएंगे।
भाषा हक हक नरेश माधव
माधव
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