नयी दिल्ली, 22 दिसंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीएमआरसी के एक कर्मचारी और सीआईएसएफ की एक महिला कांस्टेबल द्वारा एक दूसरे के खिलाफ दर्ज करवाई गई प्राथमिकी को रद्द करने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों के बीच विवाद हुआ था जिसके बाद उन्होंने एक दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दोनों के बीच समझौता होने पर उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी रद्द करने की इजाजत दे दी लेकिन उन पर पुलिस और न्यायपालिका का समय बर्बाद करने के लिये जुर्माना भी लगाया।
प्राथमिकी 2015 में दर्ज की गई थी और मामले में आरोप-पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
पक्षों के बीच समझौते के बाद प्राथमिकी को रद्द करने वाले उच्च न्यायालय ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) कर्मचारी और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) कांस्टेबल पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जिसे चार सप्ताह के भीतर दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के पास जमा कराना होगा।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा, ‘‘हालांकि, मेरा मानना है कि पुलिस और न्यायपालिका का काफी समय बर्बाद हुआ है क्योंकि प्राथमिकी वर्ष 2015 की है और आरोप पत्र भी दायर किया गया है।’’
उन्होंने कहा कि ऐसे में याचिकाकर्ताओं पर कुछ जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि उसे विश्वास है कि समझौते के आधार पर इस तरह की कार्यवाही को रद्द करने से मामले की परिणति शांति और न्याय के साथ होगी।
सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में लोक सेवक को बाधित करने, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने और लोक सेवक को आईपीसी के तहत अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला करने के कथित अपराधों के लिए राजा गार्डन मेट्रो पुलिस स्टेशन में 2015 में दोनों के खिलाफ जवाबी प्राथमिकी दर्ज की गई थी। महिला सीआईएसएफ कांस्टेबल ने डीएमआरसी कर्मी पर उनकी लज्जा भंग करने का भी आरोप लगाया था।
भाषा प्रशांत पवनेश
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