गुवाहाटी, 23 मई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को कहा कि चार साल पहले कैमरे में लुप्तप्राय एशियाई जंगली कुत्ते या ढोल की प्रजाति का केवल एक सदस्य नजर आया था लेकिन अब बड़ी संख्या में असम के काजीरंगा-कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में ये लौट आये हैं।
ढोलों की संख्या में वृद्धि का श्रेय सरकार के संरक्षण प्रयासों को देते हुए शर्मा ने कहा कि उनका प्रशासन ऐसी परिस्थितियां बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिनमें वन्यजीव फिर से फल-फूल सकें।
शर्मा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘काजीरंगा-कार्बी आंगलोंग क्षेत्र से लुप्त होने से पहले शांत और बेहद कुशल शिकारी ढोल एक समय हमारे जंगलों में स्वतंत्र रूप से घूमता था।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘लेकिन प्रकृति का वापसी का अपना तरीका होता है। वन क्षेत्र की रक्षा और विस्तार करने, पर्यावास संपर्क को मजबूत करने और अतिक्रमण वाली भूमि को मुक्त कराने के निरंतर प्रयासों के माध्यम से हम ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं, जहां वन्यजीव फिर से फल-फूल सकते हैं।’’
शर्मा ने कहा कि 2022 में कैमरे में रिकार्ड एक अकेली तस्वीर से लेकर प्रत्यक्ष दर्शन और अब 2026 में एक झुंड की पुष्टि तक, यह पुनरुद्धार की एक शक्तिशाली कहानी है।’
उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर वन्यजीव संरक्षण की राज्य की सफलता की कहानी साझा की।
मुख्यमंत्री ने कहा, “ढोल जैसे शीर्ष शिकारी की वापसी सिर्फ एक प्रजाति की बात नहीं है। यह एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र, मजबूत जुड़ाव और सतत संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है।”
ढोल, कुत्ता परिवार के जंगली सदस्य हैं, जो दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया के जंगलों में पाए जाते हैं।
चूंकि इनकी संख्या घटती जा रही थी, जिस कारण इन्हें ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर’ ने ‘लुप्तप्राय’ प्रजातियों की सूची में डाल दिया था।
भाषा राजकुमार सुरेश
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