मलप्पुरम/नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) में शामिल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने शुक्रवार को कहा कि चार मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस “अच्छा बच्चा” बन जाएगी।
आईयूएमएल के इस बयान को कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर जारी बहस पर असहमति जताने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
आईयूएमएल के प्रमुख सादिक अली शिहाब थंगल ने मलप्पुरम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह टिप्पणी की।
उन्होंने कहा, “चार मई तक इंतजार करें। कांग्रेस सभी बातों पर विचार करेगी और चार मई के बाद ‘अच्छा बच्चा’ बन जाएगी। उसके बाद यूडीएफ और कांग्रेस को उचित निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
उन्होंने कहा, “तब तक इंतजार करें। तब तक चर्चा चलने दें, इसमें कोई समस्या नहीं है। चार मई के बाद कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उसके बाद अच्छा निर्णय लिया जाएगा।”
थंगल ने यह भी कहा कि पार्टी ने यूडीएफ के सत्ता में आने की सूरत में उपमुख्यमंत्री पद की मांग नहीं की है।
उन्होंने कहा, “यह हमारे एजेंडे में नहीं है। लीग को जो भी मिलना चाहिए, वह यूडीएफ ने दिया है।”
इससे पहले आईयूएमएल के नेता पी.एम.ए. सलाम ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा करने से कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच असंतोष पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा, “हम चर्चा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाना चाहिए। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होगा और उनके बीच असंतोष बढ़ सकता है। नेताओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि फिलहाल बहस और चर्चाएं अनावश्यक हैं।
कोझिकोड से लोकसभा सदस्य एम.के. राघवन और रमेश चेन्नीथला समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी इसी तरह की राय व्यक्त की।
दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में राघवन ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर पार्टी के अंदर जारी चर्चाओं की आलोचना करते हुए कहा कि इससे कांग्रेस की छवि खराब होगी।
चेन्नीथला ने भी दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर हो रही चर्चाएं “अनावश्यक” हैं।
वहीं कन्नूर के सांसद सुधाकरन ने कहा कि निर्णय लेने से पहले चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “तभी चीजें आगे बढ़ेंगी। चुनाव परिणामों से पहले इस तरह की चर्चाएं केरल में पहले भी होती रही हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का ही हिस्सा है।”
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश
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