श्रीनगर, तीन मई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला द्वारा ‘इंडिया’ गठबंधन से मिले “कमजोर समर्थन” पर निराशा जताने के कुछ दिनों बाद कांग्रेस ने रविवार को उन पर पलटवार किया।
जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) ने एक बयान जारी कर कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की लड़ाई में असल में नेशनल कॉन्फ्रेंस ही पीछे रही है, जबकि कांग्रेस ने हमेशा इस मांग को लेकर अग्रिम मोर्चे पर रहते हुए आंदोलन किया है।
कांग्रेस ने बयान में कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की लड़ाई में नेशनल कॉन्फ्रेंस पीछे रही है, जबकि कांग्रेस ने शुरुआत से ही इस मांग के लिए सड़क पर उतरकर संघर्ष किया है।’’
हाल ही में ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में फारूक अब्दुल्ला ने ‘इंडिया’ गठबंधन, विशेषकर कांग्रेस पर जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को अपेक्षित मजबूती से न उठाने का आरोप लगाया था।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि उनकी पार्टी गठबंधन की प्रतिबद्ध सदस्य है, लेकिन विपक्षी गठबंधन अपने संभावित प्रभाव के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सका है।
अब्दुल्ला ने कहा था, “हमारी सबसे बड़ी आपत्ति इस राष्ट्रीय गठबंधन को लेकर यही रही है कि हमें उम्मीद थी कि यह हमारे मुद्दे के लिए अधिक मजबूती से लड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह बहुत दुखद है कि प्रमुख पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, वह भूमिका नहीं निभा सकी जिसकी हम उम्मीद करते हैं।”
कांग्रेस ने रविवार को पलटवार करते हुए कहा कि फारूक अब्दुल्ला लोगों का ध्यान इस तथ्य से भटका रहे हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस मुद्दे पर जमीनी स्तर पर मजबूत आंदोलन खड़ा नहीं किया और केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादे को पूरा न कराने में विफल रही है।
जेकेपीसीसी ने कहा, “कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व ने वर्षों से इस मुद्दे पर अग्रणी भूमिका निभाई है और विशेष रूप से विधानसभा चुनावों के बाद संघर्ष को और तेज किया है। पार्टी जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर लगातार सड़क पर रही है।”
जेकेपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने कहा कि कांग्रेस ने केंद्र शासित प्रदेश की कैबिनेट में भी शामिल नहीं होने का फैसला किया, जो चुनाव पूर्व गठबंधन सहयोगी का अधिकार होता है।
उन्होंने कहा, “यह केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार को बेनकाब करने के लिए किया गया था, जिसने विधानसभा चुनाव के बाद तुरंत राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था।”
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