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Monday, 20 April, 2026
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केरल में वाणिज्यिक एलपीजी की किल्लत से होटल का परिचालन ठप

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तिरुवनंतपुरम, 11 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर देश में व्यावसायिक एलपीजी की गंभीर किल्लत के चलते केरल में कई होटल और रेस्तरां बंद हो गए हैं, जबकि कई अन्य बंद होने की कगार पर हैं।

पिछले कुछ दिनों में व्यावसायिक एलपीजी की कमी और भी बदतर हो गई है, जिससे राज्य भर के कई भोजनालयों में रसोई के कामकाज में बाधा उत्पन्न हुई है।

रेस्तरां-होटल संचालित करने वालों के अनुसार, मध्यम आकार के होटल को आमतौर पर खाना पकाने के लिए प्रतिदिन कम से कम आठ एलपीजी सिलेंडर की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में वितरकों द्वारा केवल करीब पांच सिलेंडर ही आपूर्ति किए जा रहे हैं।

कई होटल मालिकों ने मौजूदा स्थिति की तुलना कुछ साल पहले इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कोविड-19 संकट से की।

तिरुवनंतपुरम में एक प्रसिद्ध शाकाहारी होटल के सह-मालिक कृष्णकुमार ने कहा कि संकट के चलते मंगलवार से शहर के 50 प्रतिशत से अधिक होटल बंद पड़े हैं।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मेरी पत्नी द्वारा संचालित एक होटल मंगलवार को बंद हो गया। यह होटल (एक अलग होटल) आज या कल बंद हो जाएगा। पिछले तीन दिन से हमारे पास जो सिलेंडर का स्टॉक था, वह खत्म हो चुका है। अगर आपूर्ति की स्थिति में तुरंत सुधार नहीं हुआ तो काम जारी रखना मुश्किल होगा।”

उन्होंने कहा कि सीमित सिलेंडर के चलते कई प्रतिष्ठानों ने पहले ही अपनी व्यंजन सूची में बदलाव कर लिए हैं।

अलप्पुझा में केरल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (केएचआरए) के जिला सचिव मनाफ ने कहा कि बुधवार को तटीय जिले में कम से कम 25 होटल बंद रहे। उन्होंने कहा कि अलप्पुझा में मंगलवार को लगभग 10 होटल बंद हो गए। अलप्पुझा एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और जिसमें रेस्तरां और कैफे सहित विभिन्न श्रेणियों में 3,000 से अधिक भोजनालय हैं।

वहीं, केएचआरए के राज्य महासचिव रजाक एनएमआर ने कहा कि एसोसिएशन के पास अभी तक राज्य भर में बंद हुए होटलों की कुल संख्या के बारे में सटीक आंकड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में खाद्य उत्पादन, सेवा और वितरण क्षेत्र में एक लाख से अधिक प्रतिष्ठान कार्यरत हैं।

रजाक ने कहा, “वर्तमान संकट उतना छोटा नहीं है जितना कई लोग समझते हैं। समाज पर इसका प्रभाव हमारी कल्पना से परे हो सकता है। हम अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि वे इसका समाधान करने के लिए तत्काल कोई व्यावहारिक उपाय खोजें।”

भाषा आशीष नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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