नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने CMRL-एक्सालॉजिक मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. अब जांच का मुख्य ध्यान केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा और उनकी कंपनी से हटकर सीपीआई (एम) नेता विजयन पर है. जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोच्चि की कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) से एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को कथित तौर पर भेजे गए पैसे का असली लाभार्थी विजयन थे. एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड अब बंद हो चुकी है और यह वीणा की एक व्यक्ति वाली कंपनी थी.
ईडी ने इस महीने की शुरुआत में केरल के DGP रवाड़ा आजाद चंद्रशेखर को भेजे अपने पत्र में कहा, “बैंक स्टेटमेंट की जांच से पता चलता है कि टी. वीणा और उनकी कंपनी को CMRL से कुल 3.28 करोड़ रुपये मिले. जांच से पता चलता है कि ये रकम बिना कोई सेवा दिए ली गई. मिली रकम और कुछ नहीं बल्कि उनके पिता पी. विजयन की ओर से ली गई रिश्वत की रकम है.” दिप्रिंट ने इस पत्र की एक कॉपी देखी है.
एजेंसी के मुताबिक, 3.28 करोड़ रुपये में से 45 लाख रुपये सीधे वीणा को सैलरी के तौर पर दिए गए थे. उसने कहा कि CMRL ने वीणा को इसलिए काम पर रखा था क्योंकि मुख्यमंत्री के पद पर उनके पिता होने के कारण उनके पास “पब्लिक रिलेशन के रास्ते” उपलब्ध थे.
एजेंसी ने कहा कि CMRL के नियुक्ति पत्र में इस्तेमाल किए गए खास शब्दों के जरिए “रिश्वत” को साफ तौर पर छिपाया गया था. एजेंसी ने कहा, “30 दिसंबर 2016 के व्यक्तिगत नियुक्ति/काम पर रखने के पत्र में लिखा था कि टी. वीणा को ‘उनके और उनके संस्थान के पास मौजूद बुनियादी ढांचे और पब्लिक रिलेशन के रास्तों को देखते हुए’ काम पर रखा जा रहा है. यह दस्तावेज पुष्टि करता है कि ‘पब्लिक रिलेशन के रास्ते’ का मतलब और कुछ नहीं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री को उनकी बेटी के जरिए दी गई रिश्वत थी.”
विजयन 2016 से 2021 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए राज्य के मुख्यमंत्री रहे.
केरल के DGP के साथ साझा किए गए ये निष्कर्ष जांच के दायरे में एक बड़ा बदलाव दिखाते हैं. अब तक जांच मुख्य रूप से वीणा, एक्सालॉजिक और CMRL के साथ उनके वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित थी. ईडी ने विजयन, वीणा और उनके पति व पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है.
दिप्रिंट ने विजयन से ईमेल के जरिए सवाल भेजकर संपर्क किया है. रियास और CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी से वॉट्सऐप और फोन कॉल के जरिए संपर्क किया गया है. जवाब मिलने पर यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.
DGP ने ईडी के पत्र को राज्य के गृह विभाग को भेज दिया. इसके बाद वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने बुधवार को ED की रिपोर्ट में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का आदेश दिया.
राज्य के गृह विभाग के एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, “ईडी की ओर से सरकार को साझा की गई रिपोर्ट की जांच के बाद विभाग ने कानूनी राय मांगी थी. राज्य के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी की राय समेत कानूनी राय में आरोपों की जांच करने की सलाह दी गई.”
इस बीच, केरल पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि ईडी की ओर से दिए गए तथ्यों और सबूतों की जांच के लिए शुरुआती जांच शुरू कर दी गई है. एफआईआर दर्ज की जाए या नहीं, इसका फैसला जांच के नतीजों के आधार पर होगा.
एसआईटी के काम से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, “भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों में जांच अधिकारी के सामने रखे गए तथ्यों और सामग्री की जांच के लिए शुरुआती जांच की जा सकती है. शुरुआती जांच के नतीजे ही जांच की दिशा तय करते हैं और इस मामले में भी ऐसा ही होगा.”
राज्य पुलिस को ईडी की ओर से भेजा गया पत्र उस मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जो CMRL की कथित भ्रष्ट गतिविधियों को लेकर गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) की जांच के आधार पर शुरू की गई थी.
केरल की एक अदालत में दायर अपनी शिकायत में SFIO ने आरोप लगाया था कि CMRL ने 15 साल में 182 करोड़ रुपये के फर्जी नकद खर्च दिखाए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अलग-अलग लोगों को रिश्वत देने के लिए किया गया. ऐसे ही एक खर्च के तहत वीणा की एक व्यक्ति वाली कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को 2.78 करोड़ रुपये दिए गए. आरोप है कि यह रकम IT कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर दी गई थी.
हालांकि, राज्य पुलिस को भेजे अपने पत्र में ईडी ने दावा किया कि उसने SFIO की जांच के दायरे से आगे की जानकारी सामने लाई है. SFIO की जांच कॉरपोरेट धोखाधड़ी तक सीमित थी और इसमें सरकारी कर्मचारियों की ओर से रिश्वत लेने से जुड़े अपराध शामिल नहीं थे. ये अपराध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आते हैं.
ईडी ने अपने पत्र में कहा, “मौजूदा जांच SFIO की ओर से दर्ज मूल अपराध के आधार पर कॉरपोरेट धोखाधड़ी और एक सरकारी कंपनी से पैसे निकालने से जुड़ी है. लेकिन PMLA [मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम] की जांच के दौरान कुछ और अपराध सामने आए हैं, जो मौजूदा मूल अपराध में शामिल नहीं हैं. कई रकम सरकारी कर्मचारियों को CMRL के पक्ष में काम करने के लिए रिश्वत के तौर पर मिली हैं. यह एक अलग अपराध है, जिसके लिए अलग मूल अपराध दर्ज किया जाना जरूरी है.”
पूर्व मंत्री ने ईडी की जांच पर सवाल उठाए
इस बीच, मामले को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए रियास ने ईडी की जांच और उन बयानों को दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए, जिनके आधार पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ मामला बनाया गया है.
रियास ने पत्रकारों से कहा, “मेरे पास सिर्फ वही जानकारी है जो टीवी पर चल रही थी. यह आधिकारिक जांच है, इसलिए टिप्पणी करने से पहले मुझे वकीलों से इस बारे में बात करनी होगी. इस समय हर बात साझा नहीं की जा सकती, लेकिन मैं वही बात दोहराऊंगा जो पहले भी कही है. कोई गलत काम नहीं हुआ है, इसलिए मैं पूरे भरोसे के साथ आगे बढ़ूंगा.”
उन्होंने कहा कि मामलों में ईडी की जांच के तरीके की देशभर में विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है और कांग्रेस इन आलोचनाओं में सबसे आगे रही है. रियास ने कहा, “लोग निश्चित तौर पर सोच रहे होंगे कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यही सरकार अब ईडी की रिपोर्ट के आधार पर जांच की अनुमति क्यों दे रही है. बाकी बात हमारी पार्टी के सचिव बताएंगे.”
उनकी यह टिप्पणी राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार की ओर से जांच का आदेश देने का फैसला “राजनीतिक मकसद नहीं, कानूनी जिम्मेदारियों” के कारण लिया गया है.
इससे पहले बेबी ने भी ईडी की जांच और UDF सरकार की ओर से एजेंसी के आरोपों की पुलिस जांच के आदेश पर सवाल उठाए थे.
बेबी ने इस हफ्ते की शुरुआत में नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा था, “इसका कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से सामना करना होगा. ईडी का इस्तेमाल बीजेपी के राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किए जाने के कई मामले सामने आए हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि केरल की यूडीएफ सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व से अलग रुख अपनाया है. उन्होंने आरोप लगाया, “केरल में एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है, जहां राज्य सरकार CPI(M) को निशाना बनाने में (नरेंद्र) मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के साथ हाथ मिलाती दिख रही है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: ED का दावा—सिसोदिया, सत्येंद्र जैन ने पंजाब के शहरी विकास प्राधिकरण के काम में दखल दिया