Thursday, 7 July, 2022
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सीजेआई बोबडे बोले, सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देना सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय नहीं

सीजेआई शरद अरविंद बोबडे ने कार्यकर्ता बिंदू अम्मिनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिस पर हाल ही में सबरीमाला मंदिर जाने की कोशिश करने पर हमला किया गया था.

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नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) शरद अरविंद बोबडे ने गुरुवार को कहा कि पिछले साल केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम निर्णय नहीं है.

सीजेआई ने यह टिप्पणी कार्यकर्ता बिंदू अम्मिनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिन्होंने मंदिर में प्रवेश के लिए सुरक्षा मांगी थी. अम्मिनी पर पिछले महीने मिर्च स्प्रे से हमला किया गया था, जब उन्होंने मंदिर में जाने का प्रयास किया था.

वरिष्ठ वकील प्रशांत पद्मनाभन जो कि अम्मिनी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उन्होंने सीजेआई के सामने मिर्ची स्प्रे हमले का मुद्दा उठाया.

पद्मनाभन ने शीर्ष अदालत से केरल सरकार को यह निर्देश देने का आग्रह किया कि वह अम्मिनी की मंदिर में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करे, क्योंकि वह तीर्थयात्रा सीजन समाप्त होने और मंदिर के बंद होने से पहले जनवरी में मंदिर जाने की तैयारी कर रही हैं.

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह द्वारा सीजेआई के समक्ष मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा भी उठाया गया था, जिन्होंने मंदिर में आने वाली सभी महिलाओं के लिए सुरक्षा की मांग की थी.

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हालांकि, सीजेआई बोबडे ने इस साल सुप्रीम कोर्ट के नवंबर के फैसले को दोहराया, जिसमें अदालत के 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कहा गया था कि एक ‘बड़ी बेंच’ मामले की सुनवाई करेगी और फैसला सुनाया कि सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति थी. लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं है.

अम्मिनी की याचिका पर अगले सप्ताह शीर्ष अदालत द्वारा सुनवाई करने की संभावना है.

सीजेआई की टिप्पणी के बाद 2018 के फैसले पर छाए  संकट के बादल

सीजेआई की टिप्पणी तब आई जब नवंबर 2018 के आदेश पर रोक के बारे में फैसले में कोई निर्देश नहीं दिया गया था.

14 नवंबर को, तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने 2018 के फैसले की समीक्षा के लिए सात जजों की बेंच के पास याचिका दायर करने का अनुरोध किया.

यह बेंच विभिन्न धार्मिक मुद्दों की फिर से जांच करेगी, जिनमें मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और दाऊद बोहरा समुदाय में महिला जननांग विकृति की प्रक्रिया शामिल है.

जबकि, पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से धार्मिक मुद्दों को एक बड़ी पीठ के लिए संदर्भित करने पर सहमति व्यक्त की, इस पीठ ने 3-2 से रिव्यु याचिका पर फैसला दिया.

न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया और सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के फैसले का अनुपालन करने का निर्देश दिया.

यह निर्णय 65 याचिकाओं, जिसमें 56 समीक्षा याचिकाओं, चार ताजा रिट याचिका और पांच अंतरण याचिकाओं पर दिया गया था – जो कि 2018 के फैसले के बाद केरल में हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद दायर की गई थीं.

(इस खबर को अंगेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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