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Sunday, 5 July, 2026
होमदेशइंस्टाग्राम एड्स में बाल यौन शोषण सामग्री पर केंद्र का META को नोटिस, एक हफ्ते में मांगा जवाब

इंस्टाग्राम एड्स में बाल यौन शोषण सामग्री पर केंद्र का META को नोटिस, एक हफ्ते में मांगा जवाब

पता चला है कि शनिवार शाम को नोटिस जारी किया गया. यह कार्रवाई BBC आई की रिपोर्ट के बाद हुई है, जिसमें कहा गया था कि इंस्टाग्राम ने भारत में यूज़र्स को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटीरियल को प्रमोट करने वाले पेड ऐड दिखाए.

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नई दिल्ली: सूत्रों ने रविवार को बताया कि केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पैसे देकर चलाए गए विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (Child Sexual Exploitative and Abuse Material – CSEAM) मिलने के मामले में मेटा को नोटिस जारी किया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम को ऐसे सभी विज्ञापन और सामग्री तुरंत हटाने का आदेश दिया है, जो इस तरह की सामग्री को बढ़ावा देते हैं या उस तक पहुंच आसान बनाते हैं. साथ ही सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा गया है.

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, CSEAM ऐसी किसी भी सामग्री को कहा जाता है जिसमें किसी बच्चे के यौन शोषण या दुर्व्यवहार से जुड़ी यौन तस्वीरें या अन्य सामग्री शामिल हो.

सूत्रों के मुताबिक यह नोटिस शनिवार शाम जारी किया गया. इससे एक दिन पहले आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर ऐसे विज्ञापन चलने के मामले में मेटा के अधिकारियों को तलब करने का निर्देश दिया था. मंत्रालय ने मेटा से पूछा है कि उसने इस मामले में क्या कार्रवाई की और प्लेटफॉर्म की मॉडरेशन नीति होने के बावजूद ऐसे विज्ञापन पैसे देकर कैसे चलाए गए. अधिकारियों ने यह भी पूछा है कि मेटा की विज्ञापन प्रकाशित होने से पहले की समीक्षा और मॉडरेशन प्रक्रिया को ये विज्ञापन कैसे पार कर गए.

यह कार्रवाई BBC Eye की जांच रिपोर्ट के बाद की गई है. रिपोर्ट में कहा गया था कि इंस्टाग्राम भारत में यूजर्स को बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रचार करने वाले पेड विज्ञापन दिखा रहा था. रिपोर्ट के मुताबिक इन विज्ञापनों में ऐसे कीवर्ड और टेलीग्राम चैनलों के लिंक थे, जहां यह सामग्री बेची जा रही थी. कुछ मामलों में इसकी कीमत 99 रुपये बताई गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, प्लेटफॉर्म की सिफारिश प्रणाली की जांच के लिए बनाए गए एक टेस्ट अकाउंट ने जैसे ही ऐसे कुछ प्रोफाइल फॉलो किए, जो आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट कर रहे थे, उसे अश्लील विज्ञापन मिलने शुरू हो गए. बाद में उसे ऐसे विज्ञापन भी दिखे जिनमें बच्चों को यौन संकेत देने वाली स्थितियों में दिखाया गया था.

BBC ने कहा कि उसने उस टेस्ट अकाउंट पर ऐसी सामग्री का प्रचार करने वाले करीब 30 विज्ञापन और वयस्क अश्लील सामग्री वाले करीब 20 विज्ञापन दर्ज किए. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि टिप्पणी मांगने के बाद ही मेटा ने इन विज्ञापनों को बंद किया, संबंधित अकाउंट निलंबित किए, सामग्री हटाई और यूआरएल ब्लॉक किए.

हालांकि मेटा ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है. कंपनी का कहना है कि कोई भी सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और उसकी समीक्षा प्रक्रिया हर बार सभी नीति उल्लंघनों का पता नहीं लगा सकती.

BBC ने टेलीग्राम के दो ऐसे चैनलों का भी जिक्र किया, जहां इस तरह की सामग्री बेची जा रही थी. इनमें से एक चैनल हटा दिया गया, जबकि दूसरा चैनल सामग्री पोस्ट करता रहा. टेलीग्राम का कहना है कि उसने 2026 में इस तरह की सामग्री से जुड़े 2,74,000 से ज्यादा ग्रुप और चैनल हटा दिए हैं.

भारत सरकार ने कहा है कि इस तरह की सामग्री के मामले में उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है. इसके तहत सभी प्लेटफॉर्म को ऐसी सामग्री की पहचान करनी होगी, उसे हटाना होगा और उसकी रिपोर्ट भी करनी होगी. इससे पहले भी इंटरपोल से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के जरिए मिली सूची के आधार पर सरकार इस तरह की सामग्री होस्ट करने वाली कई वेबसाइटों को ब्लॉक कर चुकी है.

एक हफ्ते के भीतर मेटा के खिलाफ यह दूसरी नियामकीय कार्रवाई है. 1 जुलाई को MeitY ने कंपनी को भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर की शुरुआत फिलहाल रोकने और सुरक्षा उपायों की जानकारी देने का निर्देश दिया था. मंत्रालय ने धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट घोटालों और किसी और की पहचान का गलत इस्तेमाल किए जाने के खतरे को इसकी वजह बताया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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