नयी दिल्ली, छह नवंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने आदिवासी कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत की मौत की सीबीआई जांच कराने की शुक्रवार को मांग की।
उसने आरोप लगाया कि वामपंथी और धर्मांतरण कराने वाले गिरोहों तथा कांग्रेस से जुड़े भूमाफिया तत्वों के ‘‘गठजोड़’’ के कारण उनकी मौत हुई।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि भूमाफिया और मिशनरियों के खिलाफ भगत का अभियान झारखंड के ‘‘आपराधिक और धर्म-विरोधी तत्वों’’ को रास नहीं आया।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों से भूमाफिया और मिशनरियों की साजिशों के खिलाफ निशा कुमारी भगत द्वारा चलाया जा रहा अभियान राज्य के आपराधिक और धर्म-विरोधी तत्वों को रास नहीं आया।’’
बंसल ने आरोप लगाया, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि वामपंथी और धर्मांतरण कराने वाले गिरोहों के साथ-साथ कांग्रेस से जुड़े भूमाफिया तत्वों का गठजोड़ उनकी मौत के लिए जिम्मेदार है।’’
उनकी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आखिर क्या वजह थी कि आदिवासी समुदाय की आवाज बन चुकी एक साहसी युवती को दिवाली से ठीक दो दिन पहले धनतेरस के दिन ‘फेसबुक लाइव’ के जरिए अपनी जान देनी पड़ी?’’
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि वे कौन से तत्व थे, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया और उनकी गतिविधियों से स्थानीय पुलिस प्रशासन तथा राज्य सरकार के सामने कौन-सी चुनौतियां खड़ी हो रही थीं।
बंसल ने दावा किया कि भगत राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और उसके कथित माफिया नेटवर्क से बेहद आहत थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘उनके बयानों और विचारों से स्पष्ट है कि वह राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और उसके माफिया नेटवर्क से बेहद आहत थीं। वह आदिवासी समुदाय को धर्मांतरण में शामिल ईसाई मिशनरियों के चंगुल से मुक्त कराना चाहती थीं।’’
इस घटना को ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक’’ बताते हुए बंसल ने कहा कि इससे ‘‘भ्रष्ट सरकारी तंत्र और मिशनरी नेटवर्क के बीच गठजोड़’’ उजागर होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए हम इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हैं, ताकि भविष्य में किसी भी आदिवासी कार्यकर्ता या आंदोलन से जुड़ी किसी शख्सियत को ऐसा कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर न होना पड़े।’’
भगत ने शुक्रवार को यहां फेसबुक पर ‘लाइव’ आने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी।
उनके फेसबुक प्रोफाइल पर मौजूद कथित ‘लाइव’ वीडियो में उन्हें रोते हुए देखा जा सकता है। वह आरोप लगा रही हैं कि राज्य की ‘‘‘हेमंत सोरेन सरकार और उसके जमीन के दलालों के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब मौत को बुलावा देना है।’’
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.