विल्लुपुरम (तमिलनाडु), 23 अक्टूबर (भाषा) तमिलनाडु के जिंजी के पास घर से लापता हुई सात वर्षीय बच्ची का 11 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिलने पर अपराध शाखा-अपराध जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) ने उसकी तलाश तेज कर दी है। इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक विरोध और लोगों में भारी आक्रोश है।
विल्लुपुरम जिला पुलिस से जांच अपने हाथ में लेने के बाद दूसरे दिन, सीबी-सीआईडी की टीम ने शुक्रवार को जिंजी के पास नदुपट्टू गांव में बच्ची के घर के आसपास के इलाके का नक्शा तैयार किया और उसके माता-पिता तथा अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार, कक्षा दो में पढ़ने वाली बच्ची 12 अक्टूबर को तड़के लापता हो गई थी। इससे कुछ घंटे पहले ही उसने अपना सातवां जन्मदिन मनाया था।
पुलिस के अनुसार, 11 अक्टूबर को जन्मदिन मनाने के बाद बच्ची को पिछली रात अपने माता-पिता और दादी के साथ सोते समय देखा गया था। उसके माता-पिता खेतिहर मजदूर हैं।
बाद में, एक पड़ोसी ने बताया कि बच्ची के रहस्यमय तरीके से लापता होने वाले दिन तड़के करीब तीन बजे उसने एक बच्चे को तीन बार अपनी मां को पुकारते हुए सुना था।
मामला दर्ज करने वाली सत्यमंगलम पुलिस की शुरुआती जांच में कोई नतीजा नहीं निकला। पुलिस ने 100 से अधिक कर्मियों, ड्रोन, खोजी कुत्तों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से स्थानीय कुओं, जलाशयों, खेतों और जंगलों में तलाश की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
जांचकर्ता अब बच्ची का पता लगाने के लिए 600 फोन कॉल रिकॉर्ड, 11 और 12 अक्टूबर के स्थानीय मोबाइल टावर रिकॉर्ड तथा आलमपोंडी, तिरुवलै और नदुपट्टू में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण कर रहे हैं। उन्हें संदेह है कि इसमें अपहरण करने वाले किसी गिरोह की भूमिका हो सकती है।
प्रारंभिक जांच के दौरान स्थानीय पुलिस ने कुछ प्रमुख संदिग्धों और लोगों पर ध्यान केंद्रित किया। डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल के दौरान पुलिस को तंजावुर के एक ज्योतिषी के बारे में पता चला, जिसने आलमपोंडी में लापता बच्ची के घर के पास गांव में करीब दो सप्ताह तक डेरा डाला था।
पुलिस को उस पर तब संदेह हुआ, जब पूछताछ के लिए फोन करने की कोशिश करने पर उसने अचानक फोन काट दिया और अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया।
बच्ची की तलाश में नाकामी और उसका पता लगाने में लंबे समय तक देरी होने के बाद राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिए। इसके बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक ने 22 अक्टूबर को मामला सीबी-सीआईडी को सौंप दिया।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि पड़ोसी गांवों से होकर गुजरने वाले किसी गिरोह ने सुनियोजित तरीके से बच्ची का अपहरण किया हो सकता है।
इस घटना को लेकर बड़े पैमाने पर लोगों में आक्रोश और राजनीतिक विरोध देखने को मिला। विपक्षी द्रमुक ने सरकार का ध्यान मामले की ओर खींचने और बच्ची का जल्द पता लगाने की मांग को लेकर सड़क जाम कर दी। पीएमके और अन्य दलों ने भी मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
भाषा
राखी नेत्रपाल
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