इडुक्की (केरल), 19 अप्रैल (भाषा) केरल सरकार ने बुधवार को कहा कि वह चावल खाने वाले हाथी ‘अरिकोम्बन’ के संबंध में लोगों की चिंताओं और उनके विरोध से आंख नहीं मूंद सकती।
राज्य के वन मंत्री ए.के. ससींद्रन ने कहा कि अदालतें केवल कानून के अनुसार ही काम कर सकती हैं, सरकार को जनता की चिंताओं और विचारों को ध्यान में रखना होगा।
उन्होंने कहा कि यह एक कारण था कि वन विभाग ने अपने इतिहास में पहली बार वन संरक्षक समूह बनाया, जिसने राज्य के 14 केंद्रों पर बैठकें कीं और मानव-पशु संघर्ष के संबंध में अच्छी सिफारिशें कीं।
उन्होंने अरिकोम्बन के स्थानांतरण के लिए किसी वैकल्पिक स्थल के बारे में जानकारी से इनकार किया। मंत्री ने कहा कि जहां भी हाथी को ले जाया जाएगा, वहां विरोध प्रदर्शन की संभावना होगी और “सरकार जबरन अपने फैसले लोगों पर नहीं थोप सकती है”।
उन्होंने कहा, “इसलिए हम अदालत को इसकी जानकारी देंगे और उसके निर्देश के मुताबिक आगे बढ़ेंगे।”
राज्य सरकार ने अरिकोम्बन को पकड़कर उसे अपने कब्जे में रखने की योजना बनाई थी क्योंकि राज्य के इडुक्की जिले में सुंदर मुन्नार पर्वतीय क्षेत्र के करीब चिन्नकनाल और पड़ोसी पंचायतों के निवासी चाहते थे कि हाथी को क्षेत्र से हटा दिया जाए क्योंकि वह भोजन की तलाश करते समय संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा था।
सरकार के कदम को हालांकि केरल उच्च न्यायालय ने कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा दायर जनहित याचिका पर रोक दिया था। अदालत ने तब पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति (सीओई) का गठन किया, जो यह तय करने के लिए कि हाथी को कैद में रखा जाना चाहिए या स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप प्रभावित लोगों ने विरोध किया।
विशेषज्ञ समिति ने इस हाथी को पालक्कड़ के परम्बिकुलम बाघ अभयारण्य में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया था जिससे सहमति जताते हुए अदालत ने सरकार को ऐसा करने का आदेश दिया था। हालांकि, बाघ अभयारण्य के करीब रहने वाले स्थानीय निवासी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
भाषा प्रशांत माधव
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