Saturday, 25 June, 2022
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MP में शिवराज के कोविड प्रबंधन से भाजपा नेताओं में नाराजगी, वर्चुअल बैठकों को बताया ‘तमाशा’

बैठकों में पार्टी के कई सदस्य महामारी से निपटने के लिए अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी सहित राज्य में पर्याप्त स्वास्थ्य ढांचे के अभाव का हवाला देते हुए पूर्ण लॉकडाउन पर जोर दे रहे हैं.

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नई दिल्ली: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोविड-19 की दूसरी लहर से निपटने के लिए जिस तरह काम कर रहे हैं उसे लेकर मध्य प्रदेश के भाजपा विधायकों और नेताओं में नाराजगी बढ़ती नज़र आ रही है.

यद्यपि तमाम विधायक इस मुद्दे पर दबे-छिपे ढंग से ही बातें कर रहे हैं लेकिन कुछ ने इसे सार्वजनिक तौर पर भी उठाना शुरू कर दिया है. इनमें से कई की मांग है कि राज्य में एक महीने का पूर्ण लॉकडाउन किया जाए.

राज्य में इस समय ‘जनता कर्फ्यू’ लागू है जिसके तहत सभी आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी गतिविधियों पर पाबंदी है. यद्यपि कुछ जिलों ने पहले अपने स्तर पर ही पाबंदियां लगाई थीं लेकिन बाद में राज्यव्यापी कर्फ्यू लगा, जो 18 अप्रैल को शुरू हुआ था (शुरुआत में 30 अप्रैल तक के लिए था और बाद में 7 मई तक बढ़ा दिया गया) और अब गुरुवार को इसे 15 मई तक बढ़ा दिया गया है. मुख्यमंत्री चौहान ने गुरुवार को संक्रमण रोकने के लिए ब्रेक द चेन की जरूरत पर बल देते हुए लोगों से शादियों सहित तमाम गतिविधियां स्थगित करने की अपील की.

भाजपा सूत्रों के अनुसार, बैठकों में पार्टी के कई सदस्य महामारी से निपटने के लिए अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी सहित राज्य में पर्याप्त स्वास्थ्य ढांचे के अभाव का हवाला देते हुए पूर्ण लॉकडाउन पर जोर दे रहे हैं.

इस संदर्भ में दो विधायकों, मैहर (सतना) के नारायण त्रिपाठी और भोजपुर के सुरेंद्र पटवा ने सरकार को पत्र भी लिखा है. पिछले महीने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी को लिखे अपने पत्र में पटवा ने अस्पतालों की स्थिति पर चिंता जताई और कुप्रबंधन को लेकर भी नाखुशी जाहिर की.

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वहीं मुख्यमंत्री को लिखे दो पत्रों में त्रिपाठी ने भी इसी तरह के मुद्दों को उठाया है, साथ ही इस तरह की शिकायतों का भी जिक्र किया कि निजी अस्पताल मरीजों से बहुत ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं. उन्होंने स्थिति की समीक्षा के लिए सरकार की तरफ से की जाने वाली ‘वर्चुअल बैठकों’ पर भी नाराजगी जताई और कहा कि इनसे कोई फायदा नहीं हो रहा है.

दिप्रिंट ने मैसेज के जरिये चौहान के मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क साधा लेकिन दफ्तर की तरफ से इन पत्रों और विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर टिप्पणी से इनकार कर दिया गया. हालांकि, सरकार के एक सूत्र ने कहा कि ‘कर्फ्यू लॉकडाउन की तरह ही है और इसे मुख्यमंत्री के निर्देश पर 15 मई तक बढ़ा दिया गया है.’

सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘जहां तक निजी अस्पतालों की तरफ से ज्यादा रकम वसूलने का सवाल है, सरकार ने अब तक चार अस्पतालों को सील कर दिया है. सरकार लोगों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील है.’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, मध्य प्रदेश में बुधवार को कोविड संक्रमण के 12,319 नए मामले दर्ज किए, जिसके साथ ही सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 89,244 हो गई है. राज्य में अब तक कोविड से 6,074 मौतें दर्ज की गई हैं.


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‘विंध्य क्षेत्र की हालत खस्ता’

त्रिपाठी ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा कि पार्टी वर्चुअल बैठकों का ‘तमाशा’ करने में व्यस्त है, जिससे कोई फायदा नहीं होने वाला है.’

अपने पत्रों में त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से पूर्ण लॉकडाउन लागू करने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मरीजों को न लूटें.

उन्होंने पत्र में लिखा कि बेड नहीं मिलने के कारण लोग घर पर पड़े रहने या आसपास के निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं.

उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि अगर लॉकडाउन किया जाता है तो जरूरतमंद लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए.

उन्होंने कहा, ‘मैंने एक पत्र 29 अप्रैल को और दूसरा 3 मई को लिखा था. कुछ दिन पहले मैंने मुख्यमंत्री से बात भी की. अगर हम उन लोगों की मदद करने में सक्षम नहीं हैं जिन्होंने हमें विधायक चुना है तो हमें राजनीति छोड़ देनी चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हर कोई जानता था कि दूसरी लहर भारत में दस्तक देने वाली है लेकिन फिर भी कुछ नहीं किया गया. आज भी हमारे पास बेड और ऑक्सीजन की कमी है. वेंटिलेटर हैं भी तो काम नहीं कर रहे हैं, एंबुलेंस बहुत ज्यादा शुल्क वसूल रही हैं. मैंने मुख्यमंत्री को इन सब बातों के बारे में बताया है.’

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जब भी इस तरह के मुद्दे उठाए, पार्टी नेताओं के एक वर्ग ने उन्हें विद्रोही नेता तक करार दे दिया. उन्होंने कहा, ‘मेरे पत्र, मेरी मांग और मेरी सलाहों को विद्रोह के तौर पर क्यों लिया गया? मैं भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर अपनी जिम्मेदारी समझता हूं और आपको हकीकत से अवगत कराना चाहता हूं.’

अपने पत्रों में त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि ‘कृपया मध्य प्रदेश को बचा लीजिए’ और जोर देकर कहा कि ‘पूर्ण लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प है.’

उन्होंने अपने पत्र में कहा, ‘इस समय हमारा विंध्य क्षेत्र कोविड-19 महामारी के कारण खस्ताहाल है. देश भर में यही स्थिति है. सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं हैं, वेंटिलेटर का कुछ अता-पता नहीं है, लोग बिना ऑक्सीजन के मर रहे हैं. जरूरी दवाओं की कोई व्यवस्था नहीं है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘रेमेडिसिविर इंजेक्शन के लिए हाहाकार मचा हुआ है. लेकिन टेलीविजन चैनलों पर हमारे नेता बयान दे रहे हैं कि सब कुछ ठीक है. सब कुछ नियंत्रण में है. इस तरह के बयानों से मजाक बन रहा है.’


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‘लोग हमें वोट क्यों देंगे’

मैहर के विधायक जहां सार्वजनिक रूप से इन मुद्दों पर आवाज उठाने को तैयार हैं लेकिन राज्य में कोविड प्रबंधन व्यवस्था से नाखुश भाजपा के हर नेता के साथ ऐसा नहीं है.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘पहली लहर से ही हम बुरी तरह प्रभावित हुए थे और अब एक बार फिर से झेल रहे हैं. इतने राज्यों ने पूर्ण लॉकडाउन लागू किया और इससे उन्हें फायदा भी हुआ है. महाराष्ट्र को देखिए जहां हालात एकदम भयावह थी और अब वह किस स्थिति में है.’

भाजपा के ही एक अन्य नेता ने दिप्रिंट को बताया कि पार्टी नेता वर्चुअल मीटिंग करते रहे हैं और ‘नतीजा कुछ नहीं निकलता.’

उक्त नेता ने अप्रैल में दमोह में हुए उपचुनाव, जिसमें कांग्रेस ने जीत हासिल की, को इसका संकेत बताया, ‘हम यहां सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं हैं. हम लोगों के प्रतिनिधि हैं. अगर इतने कठिन समय में भी हम उनके साथ खड़े नहीं होंगे तो वो हमें वोट क्यों देंगे?’

उन्होंने आगे कहा, ‘दमोह का नतीजा सबके सामने है. सत्ता में होने के बावजूद हम उपचुनाव हार गए. गलतियों को सुधारने के लिए अब भी समय है.’

दमोह में उपचुनाव निवर्तमान विधायक के भाजपा में शामिल होने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दिए जाने के कारण हुआ है. इसका नतीजा रविवार को घोषित किया गया.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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