Wednesday, 5 October, 2022
होमहेल्थ‘कहां हैं हमारे नेता?’- कोविड संकट के बीच नदारद नेताओं को लेकर UP के लोगों में बढ़ रही नाराजगी

‘कहां हैं हमारे नेता?’- कोविड संकट के बीच नदारद नेताओं को लेकर UP के लोगों में बढ़ रही नाराजगी

उत्तर प्रदेश अपने नेताओं से नाराज है— चाहे वे भाजपा के हों या सपा, बसपा या कांग्रेस के— क्योंकि लोगों को लगता है कि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों ने जरूरत के समय उन्हें छोड़ दिया है.

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कानपुर/लखनऊ/फतेहपुर: कानपुर निवासी अंकित वर्मा 29 अप्रैल को दुख और चिंता से एकदम बेहाल स्थिति में था जब दिप्रिंट ने उसे शहर के कांशीराम मेमोरियल ट्रॉमा सेंटर के बाहर देखा था.

30 वर्षीय यह युवक कोविड के इलाज के लिए अपने 34 वर्षीय बड़े भाई अर्पित को खाना पहुंचाकर एक घंटे पहले ही घर लौटा था जब उसे अस्पताल से आए फोन पर सूचना मिली कि उसके भाई की मौत हो गई है. इन दोनों की मां की तीन दिन पहले ही कोविड के कारण मौत हो गई थी.

अंकित वर्मा- अस्पताल, जो कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, से अपने भाई की मौत की सूचना मिलते ही यहां पहुंच गया लेकिन उसके बाद से उसे कोई जानकारी नहीं मिल रही थी.

ट्रॉमा सेंटर, जो कोविड मरीजों के इलाज के कारण सामान्य मरीजों के लिए बंद हो चुका है, के स्टाफ ने अंकित वर्मा से कहा था कि वे उसके भाई के बारे में पता लगाएंगे और फिर उसे जानकारी देंगे.

परेशान अंकित ने दिप्रिंट को बताया, ‘इसके बाद से उन्होंने दरवाजा बंद कर रखा है और मेरी कॉल का भी जवाब नहीं दे रहे हैं.’

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उसने कहा, ‘मैंने अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, जिला मजिस्ट्रेट के अलावा अपने क्षेत्र के सांसद और विधायक को भी फोन लगाया लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया. क्या हमने इसलिए ही सांसदों और विधायकों को चुना है? आज जब सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है तब आपको कोई भी राजनेता लोगों के साथ खड़ा नहीं दिख रहा है.’

कांशीराम मेमोरियल ट्राम सेंटर के बाहर खड़े अंकित वर्मा | मौसमी दास गुप्ता | दिप्रिंट

अंकित कोविड से बेहाल उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर राजनेताओं की पूरी तरह गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाने वाले अकेले नहीं है. दिप्रिंट ने गोरखपुर, इलाहाबाद सहित पूर्वी यूपी के तमाम शहरों और गांवों का दौरा करने के दौरान भीड़ भरे अस्पतालों और श्मशान घाटों पर लोगों की ऐसी ही भावनाओं को सुना. बार-बार शिकायत की गई कि प्रशासन पूरी तरह नाकाम हो चुका है और उसने लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है.

कोविड महामारी की दूसरी लहर में यूपी देश के सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक रहा है. पिछले सप्ताह संपन्न हुए कई चरण वाले पंचायत चुनाव और कई राज्यों में लॉकडाउन लगने के कारण घर लौटने वाले प्रवासी कामगारों के कारण राज्य में कोविड केस के साथ-साथ मौतों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है. राज्य के हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, 5 मई को यूपी में 31,165 नए कोविड-19 मामले और 357 मौतें दर्ज की गईं.

अपना नाम न बताने की शर्त पर इलाहाबाद स्थित एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएसची) के डॉक्टर ने कहा, ‘मैंने अप्रैल से यहां किसी राजनीतिक प्रतिनिधि को नहीं देखा, जबसे हमारे जिले में मामले बढ़े हैं, वो तो एकदम नदारत हो गए हैं लेकिन ऐसा करना उन्हें भारी पड़ेगा. लोग जिस त्रासदी से गुजर रहे हैं, उसे जल्द भुला नहीं पाएंगे.’

उत्तर प्रदेश में इस बात की खासी आलोचना हो रही है कि कैसे सत्तारूढ़ और विपक्ष दोनों ही दलों के अधिकांश नेता कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं, वो भी ऐसे समय पर जब कोविड की घातक दूसरी लहर के बीच राज्य बुरी तरह से पस्त हो चुका है.

फतेहपुर जिले के खहरेरू गांव के खेतिहर मजदूर भूरे लाल ने सवाल उठाया, ‘हमारे नेता और जनप्रतिनिधि कहां हैं. क्या उनकी जिम्मेदारी नहीं है कि इस वक्त लोगों के साथ खड़े हों.’

भूरे लाल ने बताया कि उनके गांव के हर दूसरे घर में कोई न कोई ऐसा है जो बुखार, खांसी और जुकाम से पीड़ित है. लेकिन उनमें से अधिकांश अपनी कोविड जांच कराने के लिए प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं गए हैं. उनके मुताबिक, ‘वैसे इसका कोई फायदा भी नहीं है क्योंकि पीएचसी में कोई सुविधा ही नहीं है.’

लखनऊ के एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह पिछले हफ्ते काफी समय के बाद लखनऊ के एक अस्पताल में स्थिति का जायजा लेते नज़र आए थे.

उन्होंने कहा, ‘आपने कितने मंत्रियों को अस्पतालों का दौरा करते या फिर शहरों और गांवों का चक्कर लगाकर जमीनी हालात का जायजा लेते देखा है.’

राजनेता अपने खिलाफ बढ़ती नाराजगी से अनभिज्ञ नहीं हैं लेकिन मानते हैं कि उन्हें भी संक्रमित होने का खतरा सताता रहा है.

यूपी सरकार के एक मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि ऐसा नहीं है कि मंत्री काम नहीं कर रहे.

उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री स्थिति का जायजा लेने के लिए हर रोज बैठकें कर रहे हैं. कैबिनेट मंत्रियों को भी कई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और वे भी काम कर रहे हैं. लेकिन राजनीतिक तबके में भी दहशत है. हम भी इंसान हैं… हमारे कई सहयोगी कोविड के कारण जान गंवा चुके हैं. तमाम लोग पॉजिटिव पाए गए हैं और उनका इलाज चल रहा है.’

साथ ही उन्होंने कहा, ‘निर्वाचित प्रतिनिधियों को पता है कि लोग नाराज हैं. यह एकदम साफ दिख रहा है.’

इस बीच, राज्य में कोविड के इलाज की व्यवस्था अच्छी नहीं होने को लेकर भाजपा के सांसदों और विधायकों में भी नाराजगी है.


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‘हम भी इंसान ही हैं’

बुधवार को एक अन्य भाजपा नेता और राज्य सह संगठन महासचिव, भवानी सिंह का कोविड के कारण निधन हो गया. 3 मई को यूपी भाजपा के प्रवक्ता मनोज मिश्रा की कानपुर में मौत हो गई थी. पिछले महीने भाजपा के तीन मौजूदा विधायकों में लखनऊ के सुरेश कुमार श्रीवास्तव, बरेली के केसर सिंह गंगवार और औरैया के रमेश चंद्र दिवाकर की भी मौत कोविड के कारण हुई है.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा समेत कई मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को भी जांच में कोविड पॉजिटिव पाया गया है और उनका इलाज चल रहा है या फिर बीमारी से उबरने के क्रम मे हैं.

नाम न बताने के इच्छुक मंत्री ने बताया कि होम आइसोलेशन में रहने के बाद मुख्यमंत्री पिछले हफ्ते जांच में निगेटिव आए और उन्होंने राज्य में हालात का जायजा लेने के लिए बाहर निकलकर अस्पतालों का दौरा फिर शुरू कर दिया है.

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को क्षेत्र के लोगों के संपर्क में रहने के लिए कहा है और साथ ही कोविड प्रबंधन से संबंधित विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी हैं.

उन्होंने कहा, ‘अन्य मंत्रियों ने भी बाहर निकलना शुरू किया है. औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने 1 मई को कानपुर के एक सरकारी अस्पताल में एक टीकाकरण केंद्र का शुभारंभ किया.

इस बीच, राज्य एमएसएमई मंत्री और यूपी सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दिप्रिंट से कहा कि सिर्फ इसलिए कि लोगों की स्थिति खराब है, इसका यह मतलब कतई नहीं है कि निर्वाचित प्रतिनिधि उनके लिए काम नहीं कर रहे.

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, ‘यह समय हर किसी के लिए बेहद भावनात्मक है और जब भावनाएं उबाल पर हो तो उस समय राजनीतिक बयानबाजियां कम ही होनी चाहिए.’

मंत्री ने आगे कहा, ‘हमारा काम बुनियादी स्तर पर चीजें बेहतर बनाने की व्यवस्था करना है और निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर हम कोविड के खिलाफ लड़ने और अपनी जानकारी और क्षमता के आधार पर सहायता (लोगों के लिए) हासिल करने की हरसंभव कोशिश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’

हालांकि, हर कोई किसी तरह के स्पष्टीकरण या वर्चुअल और पर्दे के पीछे से काम करने का तर्क देकर बचने की कोशिश नहीं कर रहा, कुछ लोग सामने से मोर्चा संभाले भी नज़र आ रहे हैं.

Covid patients and their families wait outside the emergency department of the district hospital at Deoria, a common sight at hospital across the state | Moushumi Das Gupta | ThePrint
देवरिया के जिला अस्पताल के बाहर इंतजार करते कोविड मरीज और उनके परिजन | मौसमी दास गुप्ता | दिप्रिंट

इन्हीं में से एक नाम है उन्नाव से भाजपा के विधायक पंकज गुप्ता का है, जो सत्ताधारी पार्टी के उन नेताओं में शुमार है जो अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाओं की व्यवस्था करने में जुटे हैं.

पंकज गुप्ता ने कहा, ‘जनप्रतिनिधि के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि संकट की घड़ी में उनके साथ रहें. मैं मार्च से ही मैदान में डटा हूं. लेकिन यह बात सही है कि हमारी पार्टी सहित कई दलों के ज्यादा निर्वाचित प्रतिनिधि बाहर नहीं निकल रहे हैं. कानपुर, उन्नाव और आसपास के जिलों में 50 से अधिक विधायक हैं लेकिन इसमें से मात्र कुछ लोग ही अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों की मदद करने के लिए आगे आए हैं.’

विधायक ने स्वीकार किया कि संक्रमण की चपेट में आने का खतरा राजनीतिक तबके को भी सताता रहा है और यही वजह है कि उन्होंने लोगों से दूर रहना ही बेहतर समझा. उन्होंने कहा, ‘कोविड के कारण कई नेताओं की जान जा चुकी है. यहां तक कि मैं भी संक्रमित था लेकिन मैंने टेस्ट में निगेटिव आने के बाद फिर से काम करना शुरू कर दिया.’

यह हाल सिर्फ सत्ताधारी पार्टी के लोगों का ही नहीं है. समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के निर्वाचित प्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर पर कुछ मदद करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं.

यूपी कांग्रेस ने हाल ही में राज्य में एक हेल्पडेस्क स्थापित की है, जिसमें लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां मुहैया कराने के अलावा संकट में घिरे लोगों के लिए ब्लड प्लाज्म (कोविड के इलाज का एक तरीका) दान किए जाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा, ‘हमने करीब 15 दिन पहले एक हेल्पडेस्क खोली है. हमारे कार्यकर्ता जमीनी स्तर लोगों की जरूरतों— अस्पतालों में बेड की व्यवस्था से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां उपलब्ध कराने तक— को पूरा करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं.


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कोविड पर कुप्रबंधन से भाजपा के सांसद, विधायक भी नाखुश

इस बीच, योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में कोविड की स्थिति से निपटने के लिए जिस तरह काम किया है, उसे लेकर भाजपा सांसदों और विधायकों में नाराजगी भी है. मध्य अप्रैल के बाद से आधा दर्जन से अधिक भाजपा सांसद और विधायक राज्य के अस्पतालों के बेड और मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों को हो रही मुश्किलों के बारे में यूपी के मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं.

यूपी के कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक, जो कानून विभाग भी संभालते हैं, इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र लिखने वाले पहले नेता थे. उन्होंने गंभीर मरीजों को बेड और ऑक्सीजन मिलना सुनिश्चित करने में लखनऊ प्रशासन की नाकामी पर ध्यान आकर्षित किया था जिसके कारण मरने वालों का आंकड़ा ज्यादा बढ़ा.

निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी न होने के संबंध में मेरठ के भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल और मोहनलालगंज के भाजपा सांसद कौशल किशोर ने भी योगी सरकार को लिखा था. किशोर ने तो यह भी मांग की थी कि राज्य में कोविड संकट के मद्देनजर चुनाव आयोग को पंचायत चुनाव रद्द कर देने चाहिए.

भाजपा नेता लाल बहादुर मौर्य की मौत के बाद भदोही से भाजपा के विधायक दीनानाथ भास्कर ने 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में जिले में कोविड अस्पताल में तैनात डॉक्टरों के खिलाफ जांच की मांग की थी.

इस बीच, भूरे लाल की यह बात आम लोगों में कायम निराशा को जाहिर करती है, जिनका कहना है, ‘पूरा गांव बीमार है, लेकिन किसी को, चाहे नेता हो या अधिकारी, कोई मतलब नहीं कि हम लोग जिंदा हैं या मर रहे हैं.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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