नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं, सिख समुदाय के सदस्यों और 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के परिजनों ने सोमवार को गुरुद्वारा बंगला साहिब से गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब तक विरोध मार्च निकाला और आरोप लगाया कि एक नवंबर को रैली कर कांग्रेस ने पुराने जख्मों को फिर से कुरेदा है।
यह मार्च भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने ‘कांग्रेस द्वारा सिखों के नरसंहार को देश कभी नहीं भूलेगा’ लिखे बैनर ले रखे थे और वे पार्टी (कांग्रेस) के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और कमलजीत सहरावत के साथ पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी मार्च में हिस्सा लिया।
पत्रकारों से बात करते हुए सहरावत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस 1984 के दंगों के दौरान सिख समुदाय को झेलनी पड़ी पीड़ा को स्वीकार करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि एक नवंबर को आयोजित उसकी रैली से पीड़ित परिवारों की भावनाएं आहत हुई हैं।
सहरावत ने कहा, ‘‘पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने और उनके जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उन्होंने एक नवंबर को रैली आयोजित कर उन जख्मों को फिर से कुरेदा है।’’
उन्होंने 1984 की हिंसा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की टिप्पणियों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने उस माहौल को बढ़ावा दिया था, जिसके कारण हमले हुए।
सहरावत ने कहा कि यह मार्च हिंसा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने और उनके परिजनों के साथ एकजुटता जताने का प्रयास है।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सिख समुदाय की पीड़ा का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया और उनसे इस बारे में स्पष्टीकरण की मांग की।
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