बेंगलुरु, 27 जनवरी (भाषा) कर्नाटक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) ने मंगलवार को यहां विधान सौध में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया और राज्य विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान राज्यपाल थावरचंद गहलोत का कथित रूप से ‘‘अपमान और अनादर’’ करने के लिए कांग्रेस के कुछ विधायकों को निलंबित करने की मांग की।
कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग की।
उन्होंने कथित आबकारी विभाग घोटाले को लेकर आबकारी मंत्री आर. बी. तिम्मापुर को हटाने की भी मांग की। साथ ही राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति, महिलाओं की सुरक्षा में कमी जैसे मुद्दों को भी उठाया।
विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता आर. अशोक और चालवाड़ी नारायणस्वामी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र, भाजपा विधान परिषद सदस्य सी. टी. रवि के अलावा जद(एस) और भाजपा के कई विधायक भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
कर्नाटक विधानसभा में 22 जनवरी को उस समय नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला था, जब राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण को संयुक्त सत्र में पढ़ने से इनकार कर दिया और मात्र तीन पंक्तियों में अपना परंपरागत भाषण समाप्त कर दिया। इस पर राज्य की कांग्रेस सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
तीन पंक्तियों का भाषण समाप्त करने के बाद जैसे ही राज्यपाल बाहर निकलने के लिए आगे बढ़े, सत्तारूढ़ दल के कुछ विधायक नारेबाजी करते हुए उन्हें घेरने की कोशिश करने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें वहां से हटाया। इन सदस्यों में विधान परिषद सदस्य हरिप्रसाद भी शामिल थे।
प्रदर्शन के दौरान कोप्पल से कांग्रेस सांसद राजशेखर बसवराज हितनाल के उस कथित बयान का भी ज़िक्र किया गया, जिसमें उन्होंने एक विदेशी महिला से बलात्कार और हत्या की घटना को मामूली बताया था। इसके अलावा कांग्रेस पर झूठा प्रचार करने के आरोप और केंद्र सरकार के नए रोजगार गारंटी कानून ‘विकसित भारत जी राम जी’ के खिलाफ कांग्रेस के विरोध को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
