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Saturday, 25 April, 2026
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भाजपा ने अनुसूचित जाति के लिए आंतरिक आरक्षण को लेकर कांग्रेस की आलोचना की

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बेंगलुरु, 25 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई ने शनिवार को अनुसूचित जाति के लिए आंतरिक आरक्षण पर कांग्रेस सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कई समुदायों के साथ अन्याय का आरोप लगाया और संशोधित ‘कोटा फॉर्मूले’ के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया।

कर्नाटक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र और भाजपा सांसद गोविंद करजोल ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए उस पर आरक्षण में कटौती और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता की कमी का आरोप लगाया।

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को कुल आरक्षण की 15 प्रतिशत की समग्र सीमा के भीतर अनुसूचित जाति (एससी) के संशोधित आंतरिक कोटा फॉमूले पर निर्णय लिया। इस फैसले से काफी समय से लंबित सरकारी भर्ती का मार्ग प्रशस्त होगा।

विजयेंद्र ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ऐतिहासिक विश्वासघात किया है और अनुसूचित जातियों की पीठ में छुरा घोंपा है।’’

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद अनुसूचित जातियों के बीच आरक्षण के वितरण में लगभग ढाई साल की देरी की, और फिर मंत्रिमंडल के फैसले में उन्हें ‘ए, बी और सी’ श्रेणियों में वर्गीकृत किया।

उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने आरक्षण को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसमें कटौती कर दी है।

विजयेंद्र ने कहा, ‘‘श्रेणी ‘ए’ के ​​लिए कोटा छह प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत और श्रेणी ‘बी’ के लिए 5.5 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसके कारण घोर अन्याय हो रहा है।’’

रोजगार के मुद्दे पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए विजयेंद्र ने कहा कि सरकार ने लाखों रिक्त पदों के बावजूद आंतरिक आरक्षण के नाम पर ढाई साल का बहुमूल्य समय बर्बाद कर दिया है। उन्होंने भर्ती के हालिया आश्वासन को ‘‘भ्रामक’’ बताया।

भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को इस ‘‘अन्याय’’ की कीमत चुकानी पड़ेगी।

इस बीच, भाजपा के प्रदेश कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए करजोल ने मंत्रिमंडल द्वारा अपनाई गई आंतरिक आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाए।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायमूर्ति एच.एन. नागमोहन दास समिति ने 17 प्रतिशत आंतरिक आरक्षण की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।

भाषा शफीक नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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