कोलकाता, 25 अगस्त (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार से 27 अगस्त तक हलफनामा दाखिल कर उन दुर्गा पूजा आयोजकों की संख्या का ब्योरा देने को कहा, जिन्होंने पिछले वर्षों में राज्य द्वारा त्योहार के लिए दिए गए वित्तीय अनुदान के बारे में उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किए हैं।
न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने जानना चाहा कि क्या पिछले आदेशों के अनुसार आयोजकों ने अनुदान राशि के उपयोग के संबंध में विवरण प्रस्तुत किया है और क्या किसी समिति ने अतीत में प्रमाण पत्र दाखिल नहीं किया है और अब भी धनराशि प्राप्त कर रही है।
इसमें कहा गया है, “जिन लोगों ने व्यय विवरण प्रस्तुत नहीं किया है, उन्हें पुनः अनुदान क्यों दिया जाएगा?”
महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि चूंकि किसी भी अदालत ने पिछले अवसरों पर दुर्गा पूजा अनुदान पर आपत्ति नहीं की थी, इसलिए उच्च न्यायालय त्योहार के बाद इस मुद्दे पर सुनवाई कर सकता है, लेकिन पीठ ने प्रतिवाद किया, “दुर्गा पूजा के बाद मामले की प्रासंगिकता क्या होगी?”
न्यायाधीशों ने कहा, “यदि उच्च न्यायालय इस मामले में कदम उठाना चाहता है, तो उसे पूजा से पहले कदम उठाना होगा।”
दत्ता ने सुनवाई के दौरान आगे तर्क दिया कि मार्च 2023 में, राज्य द्वारा उच्च न्यायालय को उन पूजा समितियों की संख्या के बारे में सूचित किया गया था जिन्होंने प्रमाण पत्र जमा नहीं किए थे।
अटॉर्नी जनरल ने आश्वासन दिया कि सरकार अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब देगी तथा राज्य सरकार उन क्लबों या समितियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देगी, जिन्होंने लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया है।
पीठ पश्चिम बंगाल सरकार के एक अगस्त के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वार्षिक दुर्गा पूजा अनुदान को बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये कर दिया गया था। यह अनुदान राज्य में 40,000 से अधिक पूजा समितियों को दिया जाता है।
इस मामले पर बुधवार को फिर सुनवाई होगी।
भाषा प्रशांत दिलीप
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