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Sunday, 14 July, 2024
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जेल की कमी के चलते पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर रही थी, अब जाकर मणिपुर सरकार ने अस्थायी जेल बनाने की दी मंजूरी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मैतेई बहुल इंफाल घाटी में एकमात्र चालू जेल, मणिपुर सेंट्रल जेल कुकियों के लिए प्रतिबंधित है. इसके चलते कुकियों को अभी तक गिरफ्तारी से छूट मिलती रही है.

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इंफाल: सीमित बुनियादी ढांचे वाले विभाजित मणिपुर के पहाड़ी जिलों में पुलिस को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है- हिरासत में रखने की जगह और जेलों की भारी कमी.

पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि इंफाल घाटी में एकमात्र जेल है- जो काम कर रहा है, वह है- मणिपुर सेंट्रल जेल. यह जेल कुकियों के लिए वर्जित है, जिसके चलते कुकियो की गिरफ्तारी प्रभावित हो रही है.

मणिपुर को पहाड़ी और घाटी जिलों में विभाजित किया गया है. राज्य के पूर्वी इलाकों में कुकी और अन्य जनजातियों का वर्चस्व है, जबकि घाटी में गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय का वर्चस्व है. इंफाल घाटी में पड़ता है. जबकि मणिपुर के 90 प्रतिशत क्षेत्र में पहाड़ियां हैं, अधिकांश सार्वजनिक सुविधाएं घाटी में केंद्रित हैं.

पिछले चार महीनों में, जब से 3 मई को मणिपुर में राज्य के बहुसंख्यक मैतेई और आदिवासी कुकी समुदायों के बीच हिंसा भड़की है, पुलिस सूत्रों ने कहा कि चुराचांदपुर में दर्ज की गई 2,700 FIR के आधार पर केवल 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. बता दें कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में शामिल करने की मांग का विरोध करने के लिए निकाले गए ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद से राज्य में हिंसा जारी है.

सूत्रों ने कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को उनकी गिरफ्तारी के दिन तुरंत जमानत पर रिहा किया जाना था क्योंकि उन्हें पहाड़ियों से घाटी तक ले जाने में जोखिम था. सूत्रों का मानना है कि उन्हें ले जाते वक्त उनपर हमला हो सकता था.

सूत्रों के मुताबिक, रिहा किए गए लोगों में शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार किए गए लोग भी शामिल हैं.

शुक्रवार को, मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि चुराचांदपुर के गणपीमुल में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सहायक प्रशिक्षण केंद्र ( STC) में एक अस्थायी जेल बनाया जाएगा और इस सुविधा के लिए एक जेलर नियुक्त किया जाएगा.

ऐसा कहा जाता है कि यह आदेश पुलिस द्वारा राज्य सरकार से मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में हिरासत सुविधा को मंजूरी देने के अनुरोध के जवाब में आया है.

आदेश में कहा गया है, “वर्तमान कानून और व्यवस्था की स्थिति के संदर्भ में घोषित अस्थायी जेल को चालू करने की तत्काल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मणिपुर के राज्यपाल एसडीओ / चुराचांदपुर और चुराचांदपुर पीएस के प्रभारी अधिकारी को जेल अधीक्षक के रूप में नामित कर रहे हैं. और उपरोक्त अस्थायी जेल के जेलर को तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक बिना किसी अतिरिक्त पारिश्रमिक के जेलर के समान कर्तव्यों का पालन करना होगा.” दिप्रिंट के पास आदेश की कॉपी है.

बुनियादी ढांचो पर भारी बोझ

सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि पिछले महीने सरकार को लिखे गए एक पत्र में चुराचांदपुर पुलिस ने प्रस्तावित जेल के लिए दो विकल्प दिए थे. इसमें एक था- BSF प्रशिक्षण संस्थान और दूसरा था असम राइफल्स का एक परिसर. अंतत: जिसे अंततः BSF प्रशिक्षण संस्थान को मंजूरी दी गई.

एक पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “BSF परिसर एक बड़ा परिसर है और हमने इमारतों के कुछ हिस्सों की भी पहचान की है जिन्हें हिरासत में कैदियों को रखा जा सकता है. हम जल्द ही इस पर काम शुरू करेंगे.”

अधिकारी ने कहा: “केवल एक जेल इंफाल में है. हम पहाड़ियों से लोगों को गिरफ्तार नहीं कर सकते हैं और उसे घाटी में ले जाने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं. हमें बीच में ही रोक दिया जाएगा और संभवतः मैतेई लोगों द्वारा उनकी हत्या कर दी जाएगी. यही कारण है कि मजिस्ट्रेट भी गिरफ्तारी के दिन ही उन्हें जमानत देने के लिए मजबूर हो जाते हैं.”


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अधिकारी ने आगे दावा किया कि जेलों की कमी के कारण पुलिस गिरफ्तारी करने में झिझक रही थी.

उन्होंने कहा, “हर कोई जानता है कि उन्हें (गिरफ्तार किए गए लोगों को) रखने के लिए कोई जगह नहीं है. हालांकि, हमने गिरफ़्तारियां की है. और इससे काफी प्रभाव भी पड़ा है. लेकिन उपद्रवियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यहां पहाड़ियों में एक हिरासत सुविधा की आवश्यकता है. हमने कुछ मामलों में आरोपपत्र भी दायर किया है और जांच पूरे जोरों पर है.”

कानून व्यवस्था बहाल करना

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 3 मई के बाद से जब मणिपुर पहली बार हिंसा की चपेट में आया था, तब से अबतक 200 से अधिक लोग मारे गए हैं. साथ ही 1,200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और 50,000 से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

आंकड़ों से पता चला कि राज्य भर में 6,500 से अधिक मामले दर्ज होने के बाद भी केवल 280 गिरफ्तारियां हुई हैं.

पुलिस के मुताबिक, इस स्तर पर आरोपी को गिरफ्तार करना और अदालत में पेश करना मुश्किल है.

घाटी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में, समुदाय के नेतृत्व वाली सशस्त्र भीड़ ने गिरफ्तारी के दौरान हस्तक्षेप किया है, जिससे पुलिस को बंदियों को रिहा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. पुलिस सूत्रों ने कहा कि कुछ मामलों में आरोपियों की पेशी के दौरान भीड़ अदालत कक्षों या न्यायाधीशों के आवासों के बाहर भी जमा हो गई है.

सूत्र इसे एक कारण बताते हैं कि पुलिस अब तक पुलिस शस्त्रागारों से लूटे गए बड़ी संख्या में हथियार बरामद नहीं कर पाई है. चार महीने से अधिक का समय बीत चुका है जब 200 से अधिक AK-47, 406 कार्बाइन, 551 इंसास राइफल, 250 मशीनगन और 6.5 लाख से अधिक गोला-बारूद पुलिस शस्त्रागारों और स्टेशनों से लूटे गए थे. इसमें से अधिकतर मैतेई-प्रभुत्व वाली इंफाल घाटी में लूटे गए.

हालांकि, हथियारों की बरामदगी काफी कम नहीं हुई है, जिसके चलते निवासियों के हाथों में हथियारों का एक बड़ा जखीरा रह गया है. दिप्रिंट द्वारा प्राप्त किए गए पुलिस डेटा के अनुसार, चुराए गए 5,668 अत्याधुनिक स्वचालित हथियारों में से अब तक केवल 1,331 ही बरामद किए गए हैं.

(संपादन: ऋषभ राज)

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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