सियांग, अरुणाचल प्रदेश: शुक्रवार देर रात हुए बंद और उसके बाद हुई हिंसा से पासीघाट अभी भी उबर रहा है. मंगलवार को दुकानें बंद रहीं, सड़कें सामान्य से ज्यादा शांत थीं और तीन दिनों की अशांति के बाद लगाए गए प्रतिबंधों के बीच लोग सावधानी से आ-जा रहे थे. परिसर के बाहर सीआरपीएफ के जवान तैनात थे, जबकि सियांग क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के तहत पूरे शहर में अलग-अलग जगहों पर अधिकारियों को तैनात किया गया था.
राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) के कार्यालय में जली हुई चीजों की गंध अब भी हवा में थी. 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (एसयूएमपी) के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान इस कार्यालय को निशाना बनाया गया था. सियांग परियोजना 2008 से जमीन पर ज्यादा आगे नहीं बढ़ी है. उस समय तत्कालीन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था.
कई सालों से सियांग बांध परियोजना का आदि और गालो आदिवासी समुदाय विरोध करता रहा है, लेकिन ये विरोध ज्यादातर उन गांवों तक सीमित थे जो परियोजना से सीधे प्रभावित होंगे. वहां रहने वाले लोगों को घर, खेती की जमीन और सामुदायिक जगहें खोने का डर है, लेकिन शुक्रवार को पासीघाट में जो हुआ, वह एक बदलाव था: प्रभावित ग्रामीण इलाकों का गुस्सा जिला मुख्यालय तक पहुंच गया.

पासीघाट के एक एनएचपीसी कर्मचारी, जो घटनास्थल पर मौजूद थे, ने कहा कि वे अब भी हुए नुकसान का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं.
नाम न बताने की शर्त पर कर्मचारी ने दिप्रिंट से कहा, “हम समझते हैं कि बांध विरोधी भावना क्यों बढ़ी है. यह जमीन इन समुदायों के लिए सांस्कृतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि बांध बनेगा या नहीं, इसका फैसला एनएचपीसी नहीं करता. अगर वे हम पर हमला करते हैं, तो सरकार बस दूसरी कंपनियों को ले आएगी. इस पूरे विरोध से सिर्फ बाहर से काम करने आए कर्मचारियों में डर पैदा हुआ है.”
जेन ज़ी का विरोध
इस आंदोलन के केंद्र में आदि जनजाति है, जो अरुणाचल प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है.
पासीघाट में वकालत करने वाले वकील सनी तायेंग ने कहा कि शहर में शुरू हुआ जेन जेड का विरोध इतना बड़ा हो जाएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी. ज्यादातर युवाओं की अगुवाई में शुरू हुआ यह प्रदर्शन शुरू में तीन चीजों के खिलाफ धरना था—बांध परियोजना का सर्वे, सुरक्षा बलों की मौजूदगी और बांध विरोधी कार्यकर्ताओं की हिरासत, लेकिन यह पासीघाट में हाल के वर्षों में हुए सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बन गया.
तायेंग ने कहा, “ये विरोध बढ़ते तनाव का नतीजा हैं. सरकार की ओर से बातचीत की बहुत कमी है, जिसकी वजह से ग्रामीणों को लगता है कि विरोध करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. अगर परियोजना को लेकर बातचीत हुई होती और प्रभावित लोगों से सहमति ली गई होती, तो शायद स्थिति इतनी तनावपूर्ण नहीं होती.”
पासीघाट में परेशानी शुरू नहीं हुई थी. सबसे पहले अपर सियांग जिले के गेकु इलाके में डिट्टे डाइम के पास टकराव हुआ था. 23 अक्टूबर को 12 घंटे के बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई महिलाओं को सांस लेने में परेशानी हुई. वहीं पुलिस का कहना था कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और सुरक्षा बलों पर हमला किया.
दिन बढ़ने के साथ गुस्सा डिट्टे डाइम से 100 किलोमीटर से ज्यादा दूर पासीघाट तक पहुंच गया, जहां जेन जेड की अगुवाई वाला प्रदर्शन मेबो की तरफ से शहर में दाखिल हुआ. शुक्रवार रात तक प्रदर्शन आगजनी और तोड़फोड़ में बदल गया. हिंसा के निशान अब भी पूरे शहर में दिखाई दे रहे हैं: पासीघाट पुल के पास जले और पलटे हुए वाहन, क्षतिग्रस्त संपत्ति और अहम जगहों पर तैनात सुरक्षा बल.

प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर रानेघाट पुल के पास पुलिस के वाहनों में आग लगा दी, एनएचपीसी कार्यालय में आग लगा दी और पासीघाट पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया. पासीघाट हवाई अड्डे के पास आदि बाने केबांग कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और फाइलों और दस्तावेजों को जला दिया गया. पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य बीजेपी अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और विधायकों निनोंग एरिंग और ओनी पनयांग के घरों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई.
पूर्वी सियांग प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुक्सिन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए हैं. इस आदेश के तहत पांच से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, बिना अनुमति जुलूस निकालने और हथियार रखने पर रोक है. जिला मजिस्ट्रेट जयंती पर्टिन ने कहा कि ये प्रतिबंध अगले आदेश तक जारी रहेंगे.
राज्य सरकार की कार्रवाई
राज्य सरकार ने पूर्वी सियांग, सियांग और अपर सियांग जिलों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 30 कंपनियां तैनात की हैं. इनमें सीआरपीएफ की 15 कंपनियां शामिल हैं, जिनमें से चार त्वरित कार्रवाई बल की हैं. पासीघाट में हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने त्वरित कार्रवाई बल की दो और कंपनियां भी भेजीं.
पूर्वी सियांग पुलिस ने पासीघाट में 23 अक्टूबर को एसयूएमपी के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के मामले में 26 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें पांच नाबालिग भी हैं. हिरासत में लिए गए लोगों में वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता एबो मिली और पासीघाट के युवा नेता ओतुल जेरांग भी शामिल हैं. दोनों ने शनिवार को पासीघाट पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया था. दोनों ने हिंसा से खुद को अलग बताया है. जेरांग ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने का इरादा था और तोड़फोड़ आंदोलन के लोकतांत्रिक मकसद के खिलाफ थी.
रिपोर्टों के मुताबिक, मिली और जेरांग ने सोमवार को हिरासत में भूख हड़ताल शुरू कर दी है.
स्थानीय लोगों के लिए तुरंत चिंता सिर्फ संपत्ति को हुए नुकसान की नहीं है, बल्कि यह भी है कि अब आगे क्या होगा. बांध विरोधी समूहों का कहना है कि परियोजना का सर्वे, सुरक्षा बलों की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं की हिरासत ने अविश्वास को और बढ़ा दिया है. वे सर्वे रोकने, केंद्रीय बलों को वापस बुलाने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और मामले वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
फिलहाल पासीघाट शांत है, लेकिन दुकानें बंद हैं, पूरे शहर में सुरक्षा बल तैनात हैं, एनएचपीसी कार्यालय में अब भी धुएं की गंध आ रही है और शुक्रवार रात की हिंसा के निशान सड़कों पर बिखरे हुए हैं. ऐसे में यह शांति अस्थायी और थोड़े समय के लिए ही दिखाई देती है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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