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Wednesday, 25 March, 2026
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सेना ने मौसम, आपदाओं का पूर्वानुमान लगाने वाली एआई प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया

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(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को यहां ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में सेना के पवेलियन का दौरा किया, जिसमें जलवायु विज्ञान और आपदा पूर्वानुमान प्रणाली से लेकर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए चालक की थकान का पता लगाने वाले उपकरण तक, कई अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया गया है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित हैं।

भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रक्षा मंत्री ने ‘भारत मंडपम’ के हॉल संख्या चार में स्थित पवेलियन का दौरा किया। इस पवेलियन ने युवा और बुजुर्ग दोनों तरह के आगंतुकों को आकर्षित किया है।

बाद में रक्षा मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज ‘भारत मंडपम’ में आयोजित ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में शामिल होकर बेहद खुशी हुई। भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है। यह शिखर सम्मेलन हमारे नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत के दिग्गजों की अपार प्रतिभा को प्रदर्शित करता है। ‘एआई इंपैक्ट समिट 2026’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से व्यक्त किया गया भारत का एआई दृष्टिकोण ‘मानव’ मानवता को सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार दुनिया की ओर अग्रसर करता है।”

उन्होंने लिखा, “नैतिकता, जवाबदेही, राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता, सुलभता और मजबूत प्रणालियों के सिद्धांतों पर अमल करने वाला भारत जिम्मेदार एआई के जरिये अगली सभ्यतागत छलांग को आकार देने में मदद कर रहा है।”

राजनाथ ने कहा, “एआई न केवल आर्थिक विकास का चालक है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सुशासन के लिए भी एक सशक्त कारक है। भारत में एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देता हूं। इस शिखर सम्मेलन को शानदार सफलता दिलाने के लिए आयोजन टीम और सभी प्रतिभागियों को बधाई।”

सेना के पवेलियन में प्रदर्शित एआई-आधारित अनुप्रयोगों में ‘प्रक्षेपण’ शामिल है, जो सैन्य जलवायु विज्ञान और आपदा पूर्वानुमान प्रणाली है।

इसके अलावा, पवेलियन में ‘एक्सफेस’,‘नभदृष्टि’ और चालक की थकान का पता लगाने तथा हादसा रोकने के लिए उसे सचेत करने में सहायक एआई-आधारित उपकरण भी प्रदर्शित किए गए।

‘एक्सफेस’ सुरक्षा और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए तस्वीर और वीडियो के जरिये त्वरित सत्यापन करने वाली ‘फेस रिकग्निशन’ प्रणाली है वहीं ‘नभदृष्टि’ ‘टेलीमेट्री रिपोर्टिंग’ प्रणाली है जिससे उड़ान भर रहे अज्ञात ड्रोन के चित्रों के आधार पर लोकेशन संबंधी डेटा और उड़ान पथ के बारे में जानकारी मिल सकती है।

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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