देहरादून, 22 दिसंबर (भाषा) कोटद्वार की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को अंकिता भंडारी हत्या मामले के तीन आरोपियों की नॉर्को एवं पॉलीग्राफ जांच कराने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई तीन जनवरी के लिए स्थगित कर दी।
बचाव पक्ष के वकील अमित सजवाण ने शपथ पत्र दाखिल करके कहा कि नार्को एवं पॉलीग्राफ जांच का अनुरोध करने वाली याचिका में स्पष्टता नहीं है, जिसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) भावना पांडे की अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी।
आरोपियों की नार्को और पॉलीग्राफ जांच कराने की याचिका अभियोजन पक्ष ने दायर की थी।
सजवाण ने कोटद्वार में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आरोपियों की नार्को और पॉलीग्राफ जांच का अनुरोध करने को लेकर अभियोजन पक्ष द्वारा दायर हलफनामे में स्पष्टता नहीं है। इसमें कहा गया है कि आरोपियों की नार्को और पॉलीग्राफ जांच कराई जानी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे नार्को जांच चाहते हैं या पॉलीग्राफ जांच कराना चाहते हैं या दोनों जांच कराना चाहते हैं।’’
सजवाण ने बताया कि याचिका पर तीन जनवरी को सुनवाई होगी।
क्रिसमस के कारण शनिवार को अदालत का कामकाज बंद रहेगा और तीन जनवरी को वह फिर से बैठेगी।
उत्तराखंड पुलिस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा की प्रदेश इकाई के एक पूर्व नेता के बेटे समेत तीन आरोपियों के खिलाफ कोटद्वार अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। एसआईटी द्वारा तैयार 500 पन्नों के आरोप-पत्र में 97 लोगों को गवाह बनाया गया है।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच के अनुरोध वाली याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि एसआईटी पहले से ही मामले की जांच कर रही है और इस जांच पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए।
भंडारी ऋषिकेश के पास पौड़ी जिले के गंगा भोगपुर इलाके में वनंतरा रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करती थी। उसकी रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों की मिलीभगत से इस साल सितंबर में कथित तौर पर हत्या कर दी थी क्योंकि उसने एक अति महत्वपूर्ण व्यक्ति (वीआईपी) को ‘अतिरिक्त सेवा’ प्रदान करने से इनकार कर दिया था।
भाषा सिम्मी अमित
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