नयी दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाइयों) के लिए न्यूनतम मानकों को लागू करने के संबंध में एक “वास्तविक और व्यावहारिक” कार्ययोजना तैयार करें।
शीर्ष अदालत को बताया गया कि गहन चिकित्सा सेवा की आपूर्ति करने वाले और संगठनों के लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं, इनपर सहमति बन गई है। ये व्यावहारिक, कार्यान्वयन योग्य तथा आईसीयू के लिए न्यूनतम मानकों के रूप में आवश्यक हैं।
न्यायमूर्ति एहसानुद्दीन अमीनुल्ला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि इन दिशानिर्देशों की प्रतियां सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी जानी चाहिए।
पीठ ने 20 अप्रैल के अपने आदेश में कहा, “सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख अतिरिक्त मुख्य सचिव/सचिव सभी संबंधित विशेषज्ञों की बैठक बुलाएं ताकि दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन के लिए एक कार्ययोजना तैयार की जा सके। यह योजना वास्तविक और व्यावहारिक होनी चाहिए।”
शीर्ष अदालत स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान, सुझाव दिया गया कि भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए, नर्सिंग स्टाफ को विभिन्न स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि वे मरीज़ के साथ 24 घंटे रहते हैं, जबकि चिकित्सक समय-समय पर ही आते हैं।
पीठ ने कहा, ‘हम इस सुझाव का पूरी तरह समर्थन करते हैं, जो न केवल व्यावहारिक है, बल्कि अत्यंत आवश्यक भी है। लिहाजा, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और पैरा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रतिवादी के रूप में इस मामले में शामिल किया जाता है।”
भाषा जोहेब माधव
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