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Wednesday, 3 June, 2026
होमदेशटीएमसी में बढ़ते बगावत के बीच पश्चिम बंगाल की सभी समितियां और फ्रंटल संगठन भंग

टीएमसी में बढ़ते बगावत के बीच पश्चिम बंगाल की सभी समितियां और फ्रंटल संगठन भंग

पार्टी ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह फैसला गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है.

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बढ़ती अंदरूनी कलह के बीच अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने बुधवार को बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए राज्य की सभी समितियों और सभी फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा की. पार्टी ने कहा कि यह कदम संगठन के पुनर्गठन और उसे और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है.

पार्टी ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह फैसला गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है.

बयान में कहा गया, “सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियां और उसके सभी फ्रंटल संगठन तत्काल प्रभाव से भंग किए जाते हैं.”

पार्टी ने कहा कि अब सभी स्तरों पर आत्ममंथन, प्रदर्शन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का व्यापक अभियान चलाया जाएगा.

टीएमसी ने कहा, “पार्टी हर स्तर पर आत्ममंथन, प्रदर्शन की समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन की व्यापक प्रक्रिया शुरू करेगी. इस प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर मूल संगठन और सभी फ्रंटल संगठनों का पुनर्गठन किया जाएगा और इसकी घोषणा उचित समय पर की जाएगी.”

पार्टी ने कहा कि यह कदम भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए संगठन को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस में बगावत के स्वर तेज होते दिखाई दे रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक कई विधायक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकों से दूर रहे हैं. वहीं पार्टी ने हाल ही में दो विधायकों को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित भी किया है.

बुधवार को कथित बागी गुट के कई नेताओं ने दावा किया कि उन्हें टीएमसी के 80 विधायकों में से बहुमत का समर्थन प्राप्त है. उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित किए जाने पर भी आपत्ति जताई है.

टीएमसी विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने कहा, “हमें सही संख्या नहीं पता… मैं बाहर से सुन रहा हूं कि 59 हस्ताक्षर मिल चुके हैं. मैंने भी हस्ताक्षर किए हैं.”

एक अन्य विधायक प्रिया पॉल ने कहा, “मैं अभी विधानसभा के अंदर जा रही हूं. बैठक के बाद बताऊंगी.”

इससे पहले सोमवार को एआईटीसी ने अपने दो विधायकों, संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया था.

राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कथित फर्जी हस्ताक्षरों और आंतरिक पत्राचार विवाद को लेकर टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला.

अधिकारी ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कानून अपना काम करेगा और चेतावनी दी कि “जिन लोगों ने हस्ताक्षर फर्जी किए हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.”

उन्होंने बताया कि 9 मई को एआईटीसी के राष्ट्रीय महासचिव ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक बनाने का प्रस्ताव भेजा था. इसके बाद 20 मई को 70 हस्ताक्षरों वाला एक और पत्र भेजा गया.

हालांकि, दो टीएमसी विधायकों ने शिकायत दर्ज कर दावा किया कि विधायक दल में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था. विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद हरे स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई और बाद में मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई.

इन घटनाक्रमों से संकेत मिल रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल और आंतरिक संघर्ष गहराता जा रहा है.

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