नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को ”पूरी तरह गलत” बताते हुए खारिज कर दिया कि बुधवार को राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ के दौरान उसके कर्मियों ने जबरन कांग्रेस मुख्यालय में प्रवेश करके पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ मारपीट की।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का सुझाव दिये जाने के बावजूद, कांग्रेस नेताओं ने ”उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों की पूरी तरह अवहेलना” करते हुए क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवधान पैदा करने की कोशिश की।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ”आरोप पूरी तरह से गलत हैं और हम इनका जोरदार खंडन करते हैं।”
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर कथित वीडियो क्लिप साझा की, जिसमें पुलिस कर्मियों को उसके कार्यालय परिसर में प्रवेश करते हुए देखा जा सकता है।
पुलिस अधिकारी ने कहा, ”हमने उन्हें जुलूस निकालने से रोकने के लिए एआईसीसी (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) का गेट बंद करने की कोशिश की थी… इस प्रक्रिया में, कुछ हाथापाई हो सकती है, लेकिन पुलिस ने एआईसीसी परिसर में प्रवेश करने की कोशिश नहीं की थी और प्रवेश करने का कोई कारण भी नहीं था।”
धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा राहुल गांधी से पूछताछ के तीसरे दिन कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजधानी में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस अधिकारी ने कहा, ”वे (कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता) पुलिस की बात नहीं सुन रहे थे। हम पिछले तीन दिन से उनसे कह रहे थे कि किसी भी जुलूस की अनुमति नहीं है। हम उन्हें जंतर मंतर पर निर्धारित स्थान पर विरोध प्रदर्शन करने के लिये कह रहे थे।”
उन्होंने कहा, ”पर्याप्त बल तैनात किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। हमने वरिष्ठ नेताओं से कहा कि हम उन्हें सुविधा प्रदान करेंगे, लेकिन वे जुलूस के लिये अन्य लोगों को भी साथ ला रहे थे। हमने उन्हें रोका और बताया जुलूस निकालने की अनुमति नहीं है।”
पुलिस के एक बयान में कहा गया है कि पिछले तीन दिन से, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के वरिष्ठ नेताओं को बार-बार सूचित किया गया है कि किसी भी तरह के जुलूस और विरोध प्रदर्शन की अनुमति केवल सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार निर्दिष्ट क्षेत्रों में ही दी जाती है।
बयान में कहा गया है, ” जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के दिल्ली पुलिस के सुझावों के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों और हमारे सुझावों की पूरी तरह से अवहेलना करते हुए क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवधान पैदा करने की बार-बार कोशिश की।
बयान के अनुसार, ”आज फिर कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से जुलूस निकालने की कोशिश की थी और वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें अनधिकृत रूप से इकट्ठा होने से रोका था। कुछ लोगों ने टायर जलाए और पुलिस बैरिकेड्स को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे यातायात जाम हुआ और यात्रियों को असुविधा हुई।”
बयान में कहा गया, ”पुलिस ने अत्यधिक संयम बरतते हुए स्थिति को बिगड़ने से रोकने की कोशिश की।”
दूसरी ओर, कांग्रेस ने मांग की है कि ”अनधिकृत प्रवेश” के लिए प्राथमिकी दर्ज की जाए। दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा और मोदी सरकार की पिट्ठू दिल्ली पुलिस गुंडागर्दी की हर सीमा पार गई। भाजपा के इशारे पर पुलिस दरवाजे तोड़कर कांग्रेस मुख्यालय में घुसी और नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को पीटा। अब लगता है कि प्रजांतत्र की हत्या हो चुकी है, संविधान को बुलडोजर के नीचे रौंद दिया गया है, केवल अत्याचार का शासन बचा है।’’
उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य इकाइयां पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बुधवार शाम को मौन विरोध प्रदर्शन करेंगी और बृहस्पतिवार सुबह देश भर में राजभवनों का घेराव करेंगी।
राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड धनशोधन मामले में बुधवार को लगातार तीसरे दिन ईडी के सामने पेश हुए।
भाषा जोहेब उमा
उमा
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