नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन ने शुक्रवार को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन वाले विधेयक को पूरी तरह से वापस लेने की मांग की और कहा कि ईसाई समुदाय तब तक ‘‘पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो सकता’’ जब तक इसे पूरी तरह से खत्म नहीं कर दिया जाता।
यूनियन ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा, ‘‘सरकार की हठधर्मिता और राजनीतिक धोखेबाजी की यादों के साथ, ईसाई समुदाय तब तक पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो सकता जब तक केंद्र सरकार संसद के दोनों सदनों से विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पूरी तरह से वापस नहीं ले लेती।’’
यह संस्था 107 साल पुरानी है। उसने सरकार से ‘‘स्पष्ट, दो-टूक और लिखित आश्वासन’’ देने का आह्वान किया कि भविष्य में कोई भी ऐसा प्रयास नहीं किया जाएगा — चाहे वह कानून के जरिए हो, प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए हो या किसी अन्य माध्यम से, जिससे चर्च की संपत्तियों और संस्थाओं पर कब्ज़ा किया जा सके या भारत के संविधान के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता को किसी भी रूप में प्रतिबंधित किया जा सके।
ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन (एआईसीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर एलियास वाज ने कहा कि समुदाय द्वारा दशकों में बनाई गई संस्थाएं ‘‘मानवीय, शैक्षिक, स्वास्थ्य सेवा और आध्यात्मिक कार्यों के लिए हैं’’। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘‘उन्हें नियंत्रित करने और कमजोर करने के सरकारी प्रयास भारतीय लोगों को आहत करेंगे।’’
यूनियन ने कहा कि विधेयक को केवल टाल देने से चिंताओं का समाधान नहीं होगा।
भाषा वैभव प्रशांत
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