scorecardresearch
Monday, 2 March, 2026
होमदेशशीतलन तक पहुंच पर केवल अमीरों का विशेषाधिकार न हो, यह स्वास्थ्य जरूरत है: संरा पदाधिकारी

शीतलन तक पहुंच पर केवल अमीरों का विशेषाधिकार न हो, यह स्वास्थ्य जरूरत है: संरा पदाधिकारी

Text Size:

(अपर्णा बोस)

नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा)संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के जलवायु परिवर्तन प्रभाग के निदेशक मार्टिन क्राउज के मुताबिक शीतलन तक पहुंच अमीरों का विशेषाधिकार नहीं है, और न ही होना चाहिए, क्योंकि यह स्वास्थ्य और गरिमा का मामला है।

क्राउज की यह टिप्पणी भारत में सामान्य से अधिक गर्मी और लू की आशंका के बीच, बुजुर्गों, बच्चों और खुले में काम करने वाले कामगारों जैसी कमजोर आबादी के लिए बढ़े खतरे के बीच आई है, जिसका सार्वजनिक स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, बिजली की मांग और आवश्यक सेवाओं पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मासिक पूर्वानुमान के मुताबिक मार्च से मई के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक दिन लू चलने की संभावना है।

क्राउज ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘जनसंख्या के कमजोर वर्ग भीषण गर्मी की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। शीतल करने वाले उपकरणों की सुविधा अमीरों का विशेषाधिकार नहीं है, और न ही होनी चाहिए, क्योंकि यह अंततः स्वास्थ्य और गरिमा से संबंधित है।’’

उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी की स्थिति में खुले में काम करने वाले श्रमिकों की उत्पादकता कम हो जाती है, और निर्माण श्रमिकों और रेहड़ी-पटरी वालों सहित अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग सबसे अधिक जोखिम में होते हैं और अक्सर उनके पास औपचारिक सामाजिक सुरक्षा या बीमे की कमी होती है।

यूएनईपी के अधिकारी ने कहा, ‘‘कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए व्यावहारिक और सिद्ध समाधान की आवश्यकता है जिन्हें लागू किया जा सके।’’ उन्होंने ताप कार्रवाई योजनाओं, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, अनधिकृत बस्तियों में ठंडी छतों, मूलभूत श्रमिक सुरक्षा और पैरामीट्रिक बीमा जैसे उपायों का जिक्र करते हुए यह बात कही।

आईएमडी के मुताबिक पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिणी और पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में गंगा के मैदान, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं जहां मार्च से मई तक भीषण गर्मी पड़ने के आसार हैं।

क्राउज ने कहा, ‘‘उपमहाद्वीप में जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप अत्यधिक गर्मी से भारत के शहरी क्षेत्रों और महानगरों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। समाधान मौजूद हैं, और ‘बीट द हीट’ पहल इस जलवायु संकट के प्रति संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली व्यापक प्रतिक्रिया का हिस्सा है।’’

यूएनईपी के अनुसार, ‘बीट द हीट’ या ‘मुतिराओ कॉन्ट्रा ओ कैलोर एक्सट्रीमो’ ब्राजील की सीओपी30 अध्यक्षता और यूएनईपी के नेतृत्व वाले ‘कूल कोएलिशन’ द्वारा शुरू किया गया एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास है। इसका उद्देश्य दुनिया भर के शहरों में सतत शीतलन और ताप प्रतिरोधक समाधानों को अपनाने में तेजी लाना और वैश्विक शीतलन संकल्प को जमीनी स्तर पर उतारना है।

भाषा धीरज नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments