हल्द्वानी, पांच जनवरी (भाषा) उत्तराखंड में नैनीताल जिले के हल्द्वानी में एक निजी अस्पताल ने एक महिला को उसकी मौत से पहले केवल दो घंटे भर्ती रहने का न केवल 80 हजार रुपये का बिल बना दिया बल्कि भुगतान न होने पर परिजनों को उसका शव सौंपने से भी इंकार कर दिया । पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार अल्मोड़ा जिले की सीमा बिरोड़िया (65) को एक जनवरी को गुर्दे की बीमारी के इलाज के लिए यहां एक अस्पताल लाया गया था जहां से अगले दिन चिकित्सकों ने उसे उच्चतर स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर कर दिया । इसके बाद परिजन उसे यहीं एक अन्य अस्पताल ले गए जहां दो घंटे चले उपचार के बाद उसकी मृत्यु हो गयी ।
महिला के परिजनों ने बताया कि दूसरे अस्पताल ने उन्हें दो घंटे के इलाज का 80,000 रुपये का बिल थमा दिया और जब उन्होंने इतने पैसे न होने की बात कही तो उन्होंने उन्हें शव सौंपने से इनकार कर दिया ।
परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्होंने किसी तरह से रिश्तेदारों से मांगकर 57,000 रुपये जुटाकर दिए लेकिन अस्पताल प्रबंधन का दिल फिर भी नहीं पसीजा ।
परिजनों ने दावा किया कि अस्पताल प्रबंधन ने पीड़ित परिवार को उनकी कार तक अपने पास रख लेने की भी धमकी दी जिसके बाद उन्होंने नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मंजूनाथ टीसी से मदद मांगी।
इस संबंध में मंजूनाथ ने बताया, ‘‘महिला को अस्पताल ने मात्र दो घंटे आपात उपचार देकर उनके परिजनों को 80,000 रुपये का बिल पकड़ा दिया । किसी तरह से उन्होंने 57,000 रुपये का भुगतान भी किया । इसके बाद भी अस्पताल द्वारा अमानवीय तरीके से बात करते हुए उन्हें डरा-धमका कर जबरन वसूली की जा रही थी और कहा जा रहा था कि शव नहीं देंगे और तुम्हें भी बंद करके पीटेंगे।’’
एसएसपी ने बताया कि रात को 10 बजे रोते-रोते पीड़ित पक्ष ने उन्हें फोन किया जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस टीम भेजकर महिला का शव अस्पताल से मुक्त कराया और परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र दिलवाया।
मंजूनाथ ने कहा, ‘‘मानव के पार्थिव शरीर का सम्मान होता है और वह जबरन वसूली का साधन नहीं बन सकता। अस्पताल, मरीज या उसके शव को वस्तु नहीं मान सकता । यह बहुत अमानवीय और निर्मम कृत्य है। इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’
उन्होंने बताया कि संबंधित अस्पताल के प्रबंधन के विरूद्ध लिखित तहरीर मिली है और उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी ।
हल्द्वानी के नगर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है ।
उधर, अस्पताल में मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार और असामान्य बिल बनाने के खिलाफ अल्मोड़ा में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया । प्रदर्शन में कई स्थानीय नेता और जिला पंचायत सदस्य शामिल थे।
प्रदर्शनकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर मृतका को श्रद्धांजलि दी तथा सरकार से संबंधित अस्पताल और उससे जुड़ी सभी ‘पैथोलॉजिकल लैब’ तत्काल बंद करने की मांग की । प्रदर्शन के दौरान चेतावनी दी गई कि यदि कार्रवाई नहीं की गयी तो इसे लेकर आंदोलन किया जाएगा।
भाषा सं दीप्ति राजकुमार
राजकुमार
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