Thursday, 26 May, 2022
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अपने काम के लिए 2021 में भारत में 4 पत्रकारों की ‘हत्या’: CPJ रिपोर्ट

अमेरिका स्थित कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार 2021 दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता के लिए बुरा साल रहा और इस वर्ष 293 पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या थी और इस दौरान 24 पत्रकार मारे गए.

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नई दिल्ली: अमेरिकी गैर-लाभकारी निगरानी संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) के द्वारा गुरुवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इस साल उनके काम के प्रति किये गए ‘प्रतिशोध’ में मारे गए पत्रकारों की संख्या सबसे अधिक है.

सीपीजे ने प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया पर हमलों पर अपने वार्षिक सर्वेक्षण में कहा कि 1 दिसंबर 2021 तक भारत में चार पत्रकारों की उनके काम के लिए हत्या कर दी गई थी, जबकि पांचवें की एक ‘खतरनाक असाइनमेंट’ के दौरान मृत्यु हो गई थी. इसमें कहा गया है कि 1 दिसंबर 2021 तक अपने द्वारा दी गई खबरों के की वजह से सात भारतीय मीडियाकर्मी सलाखों के पीछे थे.

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में कम-से-कम 24 पत्रकार अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए मारे गए, जिनमें से 19 की ‘हत्या’ की गई. शेष पांच की गोलीबारी या ‘खतरनाक असाइनमेंट’ के दौरान मृत्यु हो गई- इसमें अफगानिस्तान में मारे गए भारत के दानिश सिद्दीकी भी शामिल हैं.

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 18 अन्य पत्रकार संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए, हालांकि अभी यह पता नहीं चल सका है कि क्या उन्हें भी विशेष तौर पर निशाना बनाया गया था.

जेल में कैद पत्रकारों की कुल संख्या भी कथित तौर पर ‘अपने अब तक के उच्चतम स्तर’ तक पहुंच गई है और 1 दिसंबर 2021 तक 293 पत्रकार जेल में बंद थे.

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या रिपोर्ट कहती है कि ‘प्रेस की आजादी के पहरेदारों के लिए यह विशेष रूप से अंधकारमय वर्ष रहा है. सीपीजे की 2021 की जेल के भीतर की गयी जनगणना में पाया गया कि इस साल अपने काम के लिए जेल में बंद पत्रकारों की संख्या, 293 ने एक नया वैश्विक रिकॉर्ड बनाया, जो 2020 की संशोधित संख्या, 280 से कहीं अधिक थी.


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लगातार तीसरे साल चीन बना रहा ‘सबसे खराब’ जेलर

यह लगातार छठा वर्ष है जब सीपीजे के सर्वेक्षण ने 250 या उससे अधिक पत्रकारों को उनके काम के सिलसिले में सलाखों के पीछे डाले जाने के मामलों को दर्ज किया है, जिसके बारे में यह रिपोर्ट कहती है कि यह ‘स्वतंत्र रिपोर्टिंग के प्रति बढ़ती असहिष्णुता’ को दर्शाता है.

लगातार तीसरे वर्ष, चीन ने पत्रकारों के लिए दुनिया का सबसे खराब जेलर होने का संदेहास्पद खिताब हासिल किया है, इस महीने की पहली तारीख (01 दिसंबर) तक यहां कुल 50 पत्रकार जेल में थे.

अत्यधिक कठोर माने जाने वाले नेशनल सिक्योरिटी लॉ 2020 को लागू किये जाने के कारण पहली बार इस सर्वेक्षण में हांगकांग में हिरासत में लिए गए पत्रकारों को चीन के लिए बनी तालिका में गिना गया है.

इस रिपोर्ट के अनुसार, 1 फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के बाद मीडिया पर की गई कठोर कार्रवाई के बाद म्यांमार इस मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया. मिस्र, वियतनाम और बेलारूस शीर्ष पांच में क्रमशः अन्य पायदान पर थे.

अमेरिकी गैर-लाभकारी संस्था ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि तुर्की और सऊदी अरब जैसे कुछ देश सबसे खराब जेलरों के शीर्ष पांच की सूची से बाहर होने में कामयाब तो रहे हैं लेकिन इसने यह चेतावनी भी दी कि यह मान लेना ‘नादानी’ होगी कि ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके दिल में कोई खास तबदीली आई है.

इस रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में गंभीर कार्रवाई और हिरासत में लिए जाने की वजह से दोनों देशों में ‘पत्रकारों को खामोश’ कर दिया गया है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निरंकुशतावादी नेता ‘स्वतंत्र पत्रकारों और मीडिया आउटलेट्स को ब्लॉक करने’ के लिए इंटरनेट बंद करने और निगरानी बढ़ाने जैसी रणनीति का बड़ी तेजी के साथ उपयोग कर रहे हैं.


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भारत में मारे गए और जेल में बंद पत्रकार

जिन चार भारतीय पत्रकारों को उनके काम के लिए मार दिए जाने की ‘पुष्टि’ कर दी गई है, वे हैं- नवंबर में मारे गए अविनाश झा (बीएनएन न्यूज), अगस्त में मृत चेन्नाकेसवालु (ईवी5) और मनीष सिंह (सुदर्शन टीवी), तथा जून में हताहत हुए सुलभ श्रीवास्तव (एबीपी न्यूज).

साधना टीवी प्लस के एक पत्रकार रमन कश्यप की अक्टूबर में लखीमपुर खीरी के पास हुई हिंसा के दौरान एक ‘खतरनाक असाइनमेंट’ में मृत्यु हो गई थी.

हिरासत में डाले गए सात पत्रकारों में कश्मीर के दो पत्रकार- कश्मीर नैरेटर के आसिफ सुल्तान (2018 से) और फोटो जर्नलिस्ट मनन डार (अक्टूबर 2021 से) शामिल हैं.

भीमा कोरेगांव मामले में पत्रकार आनंद तेलतुंबडे और गौतम नवलखा अप्रैल 2020 से जेल में बंद हैं. एक अन्य पत्रकार राजीव शर्मा को संदिग्ध जासूसी के आरोप में जेल से रिहा किये जाने के तुरंत बाद जुलाई 2021 में कथित तौर पर काला धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था.

सिद्दीकी कप्पन पर अक्टूबर 2020 में हाथरस सामूहिक बलात्कार के बारे में खबरें जुटाने के लिए जाते हुए परेशानी पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए बीच रास्ते से ही गिरफ्तार कर लिया गया था. तनवीर वारसी को अन्य आरोपों के साथ-साथ अवैध रूप से एक अखबार चलाने के आरोप में भोपाल में गिरफ्तार किया गया था.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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