नई दिल्ली: सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि 1 जनवरी 2021 से 30 जून 2026 के बीच देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 332 सफाईकर्मियों की मौत हुई है.
डीएमके सांसद डी. रवि कुमार के एक अतारांकित सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि ये आंकड़े राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) ने दिए हैं.
सबसे ज्यादा 58 मौतें महाराष्ट्र में हुईं. इसके बाद हरियाणा (47), तमिलनाडु (38), उत्तर प्रदेश (37), दिल्ली (29), गुजरात (27) और राजस्थान (23) का नंबर है. मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 13-13, जबकि कर्नाटक और पंजाब में 12-12 मौतें हुईं. तेलंगाना में 9, आंध्र प्रदेश में 5, दादरा और नगर हवेली में 3, बिहार और ओडिशा में 2-2, जबकि गोवा और झारखंड में 1-1 मौत दर्ज की गई.
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर मंत्री ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 193 एफआईआर दर्ज की गई हैं.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार ने राज्यों में मशीनों से सीवर सफाई (Mechanised Sewer Cleaning) के लागू होने का आकलन किया है, तो उन्होंने जवाब दिया, “नहीं.”
मैनुअल स्कैवेंजिंग खत्म करने के लिए उठाए गए कदमों पर मंत्री ने ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 2013 से मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध है.
उन्होंने कहा, “इस तारीख के बाद कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी को मैनुअल स्कैवेंजिंग के लिए नियुक्त नहीं कर सकती.” उन्होंने बताया कि इस कानून के उल्लंघन पर दो साल तक की जेल, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
मंत्री ने कहा कि हाल ही में सभी जिलों में किए गए सर्वे में मैनुअल स्कैवेंजिंग का कोई मामला सामने नहीं आया.
लोकसभा सांसद अप्पलानायडू कालीसेट्टी और बायरेड्डी शबरी के एक अलग सवाल के जवाब में अठावले ने बताया कि 2013 और 2018 में मैनुअल स्कैवेंजर्स की पहचान के लिए सर्वे किए गए थे. 2018 के सर्वे में 44,217 लोग चिन्हित हुए थे.
इनमें सबसे ज्यादा 20,884 उत्तर प्रदेश, 6,325 महाराष्ट्र और 4,854 उत्तराखंड में थे. आंध्र प्रदेश में 1,734 लोग चिन्हित हुए थे, जिनमें से 1,231 अनंतपुर जिले के थे.
मंत्री ने कहा, “हाल ही में 2013 के कानून के तहत देश के सभी जिलों में नया सर्वे कराया गया, जिसमें एक भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं मिला.”
2023 में शुरू की गई राष्ट्रीय यांत्रिक स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र (NAMASTE) योजना के बारे में मंत्री ने बताया कि इसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों को सुरक्षा और सम्मान देना है.
उन्होंने कहा कि अब तक 89,915 कर्मचारियों का सत्यापन किया गया है और 87,037 PPE किट बांटी गई हैं. सबसे ज्यादा सत्यापन उत्तर प्रदेश (12,463) में हुआ, इसके बाद महाराष्ट्र (8,782) और गुजरात (7,648) का स्थान है.
आंध्र प्रदेश में 4,052 कर्मचारियों का सत्यापन किया गया और 4,005 PPE किट दी गईं. इनमें विशाखापट्टनम में सबसे ज्यादा 533 कर्मचारियों का सत्यापन हुआ.
योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बनाई गई इमरजेंसी रिस्पॉन्स सैनिटेशन यूनिट्स (ERSUs) को 753 सुरक्षा उपकरण भी दिए गए हैं. इनमें सेफ्टी हेलमेट, टॉर्च, सेफ्टी ट्राइपॉड, एक्सियल फैन ब्लोअर, एंटी-स्टैटिक कंड्यूट, फुल बॉडी वाडर सूट और मल्टी-गैस डिटेक्टर शामिल हैं.
मंत्री ने बताया कि NAMASTE केंद्र सरकार की योजना है, इसलिए इसमें राज्यवार फंड आवंटन का प्रावधान नहीं है.
उन्होंने कहा कि 2023-24 में 30.06 करोड़ रुपये, 2024-25 में 47.625 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिनमें से 35.64 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि 2025-26 में 97.6791 करोड़ रुपये जारी और खर्च किए गए. 2026-27 में अब तक 28.30 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिनमें से 12.45 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
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