नई दिल्ली: 2026 की NEET UG परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने के मामले में देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ दिन बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को इस मामले में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी. इसमें गिरफ्तार किए गए सभी 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं. इनमें प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी भी शामिल हैं.
कुलकर्णी 2019 से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के केमिस्ट्री एक्सपर्ट पैनल में थे. आरोप है कि उन्हें पूरा प्रश्नपत्र देखने की पहुंच थी, क्योंकि अंग्रेजी से मराठी में उसका अनुवाद करने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी.
CBI के मुताबिक, कुलकर्णी ने कथित तौर पर कम से कम 21 लाख रुपये कमाए. आरोप है कि उन्होंने दो अन्य विषय विशेषज्ञों के साथ मिलकर अपने पढ़ाए छात्रों को प्रश्नपत्र लीक किया.
जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद सवालों को एक नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाया गया. इसमें कोचिंग संस्थानों के संचालक, काउंसलिंग सेंटर चलाने वाले लोग और दूसरे बिचौलिए शामिल थे. इसके बाद प्रश्नपत्र छात्रों और उनके परिवारों को 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की रकम लेकर बेचा गया.
जांच अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद प्रश्नपत्र लीक करके पैसा कमाना था. साथ ही कोचिंग संस्थानों के छात्रों का रिजल्ट बेहतर करना और उनकी साख बढ़ाना भी था. CBI की जांच में कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसमें कोचिंग संस्थान, NTA के विषय विशेषज्ञ और एजेंट शामिल थे.
एक सूत्र ने बताया, “मुख्य आरोपी पी.वी. कुलकर्णी अपने घर पर 10 से 15 छात्रों को पढ़ाते थे. वहां दो अन्य विषय विशेषज्ञों के साथ विशेष क्लास होती थी. कुलकर्णी छात्रों को प्रश्न बोलकर लिखवाते थे. उनके पास पूरा प्रश्नपत्र था, इसलिए वे सवाल बोलते थे और छात्रों से उन्हें कॉपी में लिखवाते थे.”
सूत्र ने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि प्रश्नपत्र लीक करने वाला कोई अलग आपराधिक गिरोह काम कर रहा था. “जांच में सामने आया कि कोचिंग संस्थान चलाने वाले कुछ लोगों का एक नेटवर्क था, जो चाहता था कि उनके यहां पढ़ने वाले छात्र परीक्षा पास करें. इससे संस्थानों की प्रतिष्ठा बढ़ती और ज्यादा छात्र आते.”
सूत्र के मुताबिक, NTA के विषय विशेषज्ञों ने प्रश्नपत्र लीक करने के बदले लाखों रुपये कमाए. वहीं जिन लोगों ने बाद में प्रश्नपत्र हासिल कर आगे बेचा, उन्होंने हर प्रश्नपत्र या उसके अलग-अलग हिस्से बेचकर 50 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक कमाए. जांच में किसी भी आरोपी का पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला.
CBI के प्रवक्ता ने बताया कि कुलकर्णी के अलावा NTA पैनल की विषय विशेषज्ञ मनीषा हवालदार और मनीषा मांधरे के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं. मांधरे को प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी और उन्हें बॉटनी और जूलॉजी दोनों सेक्शन की जानकारी थी. जबकि हवालदार को सिर्फ फिजिक्स सेक्शन की जानकारी थी.
CBI के मुताबिक, कुलकर्णी ने मनीषा वाघमारे की ओर से बुलाए गए छात्रों की विशेष क्लास ली. इन क्लासों में उन्होंने सवाल, विकल्प और उनके जवाब बोलकर लिखवाए. छात्र उन्हें अपनी कॉपी में लिखते थे. जांचकर्ताओं का कहना है कि छात्रों की कॉपी में लिखे गए सवाल लगभग पूरी तरह असली NEET प्रश्नपत्र से मेल खाते थे.
CBI के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “पैसों के लेनदेन की जांच की गई. आरोपियों के कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिए गए हैं. डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और अकादमिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी हासिल की गई है. इन रिपोर्टों ने साबित किया कि परीक्षा से पहले लीक हुए प्रश्नों को फैलाने में आरोपियों की भूमिका थी.”
द प्रिंट ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर जांच शुरू करने वाली CBI ने पुणे के केमिस्ट्री प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी को पूरी साजिश का मास्टरमाइंड माना है. यह जांच परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर बढ़ती चिंताओं और आरोपों के बीच शुरू की गई थी.
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में CBI ने 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक सबूतों का हवाला दिया है. एजेंसी ने सभी 13 आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, सबूत नष्ट करने समेत कई धाराओं में आरोप लगाए हैं. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं.
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