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Thursday, 21 May, 2026
होमदेश2020 दिल्ली हिंसा मामले में अदालत ने तीन लोगों को दंगे और गैरकानूनी जमावड़े का दोषी ठहराया

2020 दिल्ली हिंसा मामले में अदालत ने तीन लोगों को दंगे और गैरकानूनी जमावड़े का दोषी ठहराया

अदालत ने कहा कि सबूतों से यह साबित होता है कि तीनों दोषी “पुलिस बल पर लगातार पत्थरबाजी करने वाली भीड़” के सदस्य थे और उन्होंने अधिकारियों को ड्यूटी करने से रोका.

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नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में तीन लोगों को दोषी ठहराया है. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि वे एक गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे, जिसने खजूरी खास में हिंसा के दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को काम करने से रोका.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह इकराम, सरफराज और मुस्तकीम के खिलाफ दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने के मामले की सुनवाई कर रहे थे. अदालत ने कहा कि सबूतों से उनका दोष साबित होता है.

18 मई के आदेश में अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत साफ तौर पर साबित करते हैं कि पूरे संबंधित समय के दौरान गैरकानूनी भीड़ लगातार पुलिस बल पर पत्थरबाजी कर रही थी, जिससे सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सके और कई पुलिसकर्मी घायल हुए.”

अभियोजन के अनुसार, तीनों पर आरोप था कि वे 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान भजनपुरा पुलिस बूथ और करावल नगर रोड के पास हुई हिंसा का हिस्सा थे, जहाँ कथित रूप से उग्र भीड़ ने दुकानों, ठेलों और पुलिस बूथ में आग लगा दी और पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके.

यह आरोप लगाया गया कि इलाके में गश्त कर रहे पुलिस अधिकारियों ने लोगों से बार-बार हटने को कहा और निषेधाज्ञा की घोषणा की, लेकिन इसके बाद भीड़ हिंसक हो गई. झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हुए.

इसके बाद खजूरी खास पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई और सभी आरोपियों पर उकसाने, दंगा करने, घातक हथियार रखने, गैरकानूनी जमावड़ा करने और सरकारी कर्मचारी को सार्वजनिक कार्य करने से रोकने के आरोप तय किए गए.

अदालत ने कहा कि भले ही हर आरोपी के खिलाफ कोई खास हिंसक कार्रवाई साबित नहीं हुई, लेकिन अगर भीड़ एक समान उद्देश्य से काम कर रही हो, तो गैरकानूनी भीड़ का सदस्य होना ही जिम्मेदारी तय करने के लिए काफी है.

न्यायाधीश ने कहा, “ये अपराध लगातार जारी थे और भीड़ अपने समान उद्देश्य को पूरा करने के लिए इन्हें अंजाम दे रही थी. इसलिए जो भी व्यक्ति उस गैरकानूनी भीड़ का सदस्य पाया गया, वह जिम्मेदार माना जाएगा.”

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा, “गैरकानूनी भीड़ का सदस्य होने का सबूत ही सामूहिक जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त है.”

हालांकि अदालत ने कहा कि पुलिस बूथ में आग लगाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के लिए दोषी ठहराए गए लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. अदालत ने यह भी कहा कि IPC की धारा 148, जो घातक हथियार से जुड़ी है, साबित नहीं हुई.

अदालत ने कहा कि सबूतों से यह साबित होता है कि तीनों दोषी “पुलिस बल पर लगातार पत्थरबाजी करने वाली भीड़” के सदस्य थे और उन्होंने अधिकारियों को ड्यूटी करने से रोका.


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