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Monday, 5 October, 2026
होमदेश2020 दिल्ली दंगे: ‘हेट स्पीच’ पर नेताओं के खिलाफ FIR और SIT जांच की मांग वाली याचिकाएं HC ने खारिज की

2020 दिल्ली दंगे: ‘हेट स्पीच’ पर नेताओं के खिलाफ FIR और SIT जांच की मांग वाली याचिकाएं HC ने खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2019 में जामिया हिंसा के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाएं भी खारिज कीं.

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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित ‘हेट स्पीच’ को लेकर नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं के एक समूह को खारिज कर दिया.

जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई हिंसा के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया.

फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा, “फैसलों में बताए गए कारणों के आधार पर दोनों याचिकाएं (याचिकाओं का समूह) खारिज की जाती हैं.” कोर्ट के विस्तृत फैसले अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

दंगों से जुड़ी याचिकाएं 2020 में दाखिल की गई थीं. इनमें राजनीतिक नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने समेत कई मांगें की गई थीं, जिन पर अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहने का आरोप था.

इनमें से एक प्रमुख याचिका शेख मुजतबा फारूक ने दाखिल की थी. इसमें बीजेपी बीजेपी नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी. इन नेताओं के उन भाषणों का हवाला दिया गया था, जिन्हें हिंसा से कथित तौर पर जोड़ा गया था.

वहीं, वकीलों की रजिस्टर्ड संस्था Lawyers Voice ने दूसरी याचिका दाखिल की थी. इसमें कई विपक्षी नेताओं के कथित हेट स्पीच को लेकर कार्रवाई की मांग की गई थी. इनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मनीष सिसोदिया, अमानतुल्लाह खान, अकबरुद्दीन ओवैसी और वारिस पठान के नाम शामिल थे.

सीपीआई(एम) नेता बृंदा करात ने दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और दूसरे राज्य अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की थी.

एक अन्य याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अजय गौतम ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के पीछे कथित विदेशी फंडिंग और “अंतरराष्ट्रीय साजिश” की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग की थी.

फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क गए थे. इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे.

ये याचिकाएं कई सालों से लंबित थीं. सुप्रीम कोर्ट ने कई बार हाईकोर्ट से इन पर जल्द सुनवाई करने को कहा था. दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं के खिलाफ एफआईआर और जांच की मांग वाली एक याचिका पर हाईकोर्ट से कहा था कि वह इसे प्राथमिकता के आधार पर, संभव हो तो तीन महीने के भीतर, तय करे.

अक्टूबर 2023 में भी हाईकोर्ट से इन मामलों पर जल्द सुनवाई करने को कहा गया था.

पिछले साल भी यह मामला हाईकोर्ट के सामने आया था. तब बेंच ने समानांतर कार्यवाही की जरूरत पर सवाल उठाया था. उस समय कोर्ट को बताया गया था कि इसी तरह का एक मामला सुप्रीम कोर्ट में पहले से चल रहा है.

हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उनकी मांगें सामान्य आपराधिक कार्यवाही के तहत मिलने वाली राहत से आगे की हैं. इनमें दिल्ली के बाहर के अधिकारियों को शामिल करके एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने और उससे जांच कराने की मांग भी शामिल थी.

दिल्ली पुलिस ने इन याचिकाओं का विरोध किया था. पुलिस का कहना था कि दंगों की जांच में ऐसा सामने नहीं आया है कि राजनीतिक नेताओं ने हिंसा के लिए लोगों को उकसाया या हिंसा में हिस्सा लिया था. पुलिस ने यह भी कहा था कि पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ पहले से ही कानूनी रास्ते मौजूद हैं.

हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ दंगों और कथित हेट स्पीच को लेकर नई या स्वतंत्र जांच की मांग वाली इस दौर की कानूनी कार्रवाई खत्म हो गई है. हालांकि, कोर्ट के विस्तृत फैसले यह समझने में अहम होंगे कि बेंच ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों, पहले से चल रही जांच और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही के बीच संबंध को किस तरह देखा.

कोर्ट ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जामिया में कथित पुलिस हिंसा से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया. छात्रों ने स्वतंत्र जांच की मांग की थी. कुछ मामलों में उन्होंने जांच दिल्ली पुलिस से लेकर किसी बाहरी एजेंसी को सौंपने की भी मांग की थी.

आदित्य इदरा TPSJ के पूर्व छात्र हैं और फिलहाल दिप्रिंट में इंटर्न के तौर पर काम कर रहे हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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