नई दिल्ली: सवालों के पेपर के लिए कथित तौर पर 3-3 लाख रुपये देने वाले दो डॉक्टर, लीक हुए सवाल पाने वाले तीन छात्र और पुणे में लीक हुए पेपर की फोटोकॉपी के लिए अपने गूगल पे अकाउंट से 235 रुपये देने वाला एक व्यक्ति—ये वे अहम गवाह हैं, जिनके बयानों के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस साल के नीट-यूजी पेपर लीक केस को आगे बढ़ा रही है.
इसके अलावा, गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार के निर्देश पर लीक हुआ सवालों का पेपर लेने के लिए नासिक और पुणे के बीच आने-जाने वाले एक व्यक्ति को भी दिल्ली की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में इस मामले में अहम गवाह बनाया गया है.
कुल मिलाकर, ऐसे 12 गवाह हैं, जिनके बयान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 183(5) के तहत दर्ज किए गए हैं. इस प्रावधान के तहत बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए जाते हैं और इनका महत्व भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 180 के तहत जांच अधिकारियों के सामने दर्ज किए गए बयानों से ज्यादा होता है. एजेंसी ने 160 से ज्यादा गवाहों की एक सूची कोर्ट में पेश की है, जिनके बयान धारा 180 के तहत दर्ज किए गए हैं.
शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर 12 मई को केस दर्ज करने के बाद सीबीआई ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और सभी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है. इनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के पैनल के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं.
विषय विशेषज्ञों की जोड़ी पी. वी. कुलकर्णी और मनीषा मंधारे पर आरोप है कि उन्होंने अपने घरों पर आयोजित विशेष कक्षाओं के दौरान सवालों के पेपर लीक किए. तीसरे विषय विशेषज्ञ मनीषा हवलदार पर आरोप है कि उन्होंने फिजिक्स के सवाल मंधारे के साथ साझा किए और एक स्थानीय स्रोत के जरिए भी उन्हें लीक किया.
छात्र, डॉक्टर और पेपर पहुंचाने वाले लोग
अपनी चार्जशीट में एजेंसी ने आरोप लगाया है कि लातूर के सिद्धिविनायक अस्पताल के मालिक ने दो डॉक्टरों को कुलकर्णी से मिलवाया था. इन डॉक्टरों पर कथित तौर पर केमिस्ट्री के सवालों का पेपर लीक करने में शामिल होने का आरोप है. इन दोनों डॉक्टरों ने अपने बेटों के लिए सवालों के पेपर हासिल करने के लिए कुलकर्णी को 3-3 लाख रुपये दिए.
इन पिता-पुत्रों से न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए. इन बयानों से विषय विशेषज्ञ कुलकर्णी की पूरी योजना और तरीका सामने आया कि विशेष कक्षाओं के जरिए लीक हुए सवाल छात्रों तक कैसे पहुंचाए जाने थे. अपने बयानों में दोनों डॉक्टरों ने बताया कि 3-3 लाख रुपये का सौदा गुजरात के लातूर में कुलकर्णी के घर पर हुआ था.
जांच के दौरान एजेंसी ने पुणे की कारोबारी मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया. उसे लीक हुए सवालों के स्रोत और राजस्थान में सवाल पाने वाले छात्रों के बीच एक अहम कड़ी होने के कारण “मुख्य मददगार और साजिशकर्ता” बताया गया है.
उसके फोन की जांच के दौरान एजेंसी को पता चला कि वाघमारे एक व्हाट्सऐप ग्रुप में कुलकर्णी और नीट की तैयारी कर रहे दो छात्रों के साथ थी. दोनों छात्रों ने अपने बयानों में बताया कि वे उन छात्रों की सूची में थे, जो कुलकर्णी और मंधारे के घरों पर कोचिंग कक्षाओं में जाते थे. उनके बयानों के आधार पर एजेंसी ने बायोलॉजी और केमिस्ट्री के उनके हाथ से लिखे नोट्स भी जब्त किए.
उन्होंने यह भी बताया कि वाघमारे उनके नोट्स और किताबें ले गई थी. एजेंसी का आरोप है कि इन्हीं का इस्तेमाल लीक हुए सवालों को दोबारा तैयार करने और उन्हें नासिक में शुभम खैरनार तक पहुंचाने के लिए किया गया.
वाघमारे ने कथित तौर पर दोनों छात्रों से मिले लीक हुए सवालों को पुणे में अपने पति के डेंटल क्लिनिक में तैयार करने के बाद कुलकर्णी और मंधारे को भेजा था.
एजेंसी ने उसके पति के डेंटल क्लिनिक के पास लगे कैमरे की सीसीटीवी फुटेज भी जब्त की है. इसमें वह इस साल 20 अप्रैल को दो लोगों के साथ वहां पहुंचती दिखाई दे रही है. दोनों लोगों से न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पूछताछ की गई और उनके बयान फास्ट-ट्रैक कोर्ट में पेश किए गए.
अपने बयानों में दोनों ने बताया कि हाथ से लिखे हुए लीक सवालों को डेंटल क्लिनिक में टाइप किया गया था. इसके अलावा, एजेंसी ने 27 अप्रैल की सीसीटीवी फुटेज भी जब्त की है. इसमें वाघमारे, धनंजय लोखंडे और उसके एक साथी के साथ दिखाई दे रही है. दोनों आपस में बात करते हुए क्लिनिक की तरफ जाते दिखाई दे रहे हैं.
सीबीआई के अनुसार, लोखंडे के साथ मौजूद व्यक्ति ने पुष्टि की कि लोखंडे ने उसे पास की एक दुकान पर फोटोकॉपी कराने के लिए दो सेट दिए थे—एक टाइप किया हुआ और दूसरा हाथ से लिखा हुआ. एजेंसी के अनुसार, फोटोकॉपी कराने के लिए उस व्यक्ति ने अपने गूगल पे अकाउंट से 235 रुपये का भुगतान किया.
इसके अलावा, उसने बताया कि उसने लीक हुए सवालों को पुणे के एक बड़े कॉलेज के बाहर एक दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया. इन दोनों लोगों को इस मामले में अहम गवाह बनाया गया है. पुणे से सवाल लेने वाले व्यक्ति ने बताया कि वह खैरनार के निर्देश पर नासिक से पुणे गया था और लोखंडे के साथी से लीक हुए नीट-यूजी 2026 के सवालों की फोटोकॉपी ली थी.
सीबीआई ने नासिक के दो लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं. इनमें वह व्यक्ति भी शामिल है, जिसने खैरनार को लीक हुए सवालों के पेपर की कॉपियां बनाने में मदद की थी. सीबीआई के मामले के लिए दूसरा अहम गवाह उन नीट छात्रों में से एक है, जिसे खैरनार ने सवाल दिए थे. इसके बाद उसने ये सवाल गुरुग्राम में यश यादव को दिए, जहां से आखिरकार ये सवाल राजस्थान पहुंचे.
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