(फोटो के साथ)
मुंबई, 15 अप्रैल (भाषा) दीपक सावंत ने अपनी बेटी जुई (18) से आखिरी बार जब बात की थी तब वह एक कार्यक्रम के लिए सकुशल पुणे पहुंची थी। बेटी की मौत के समाचार से गमगीन सावंत ने शनिवार को कहा कि उन्हें तब इस बात का कतई भी अंदाजा नहीं था कि यह बेटी से उनकी अंतिम बातचीत है।
गौरतलब है कि पुणे से मुंबई जा रही एक निजी बस रायगढ़ जिले में राजमार्ग पर ‘घाट’ (पहाड़ी दर्रा) खंड में स्थित शिंगरोबा मंदिर के पास शनिवार तड़के करीब चार बजकर 50 मिनट पर खाई में गिर गई। हादसे में जुई समेत 13 लोगों की मौत हो गई और 29 घायल हो गए।
सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत सावंत ने कहा, ‘पुणे के लिए निकलते समय, जुई ने मुझसे कहा कि जब वह शहर पहुंचेगी तो मुझे फोन करेगी और उसने ऐसा किया। मेरी बेटी के साथ यह मेरी आखिरी बातचीत थी।’
उन्होंने कहा कि जुई ने हाल ही में 11वीं की परीक्षा दी थी।
उन्होंने बताया, ‘सुबह करीब सात बजे पुलिस ने हमें घटना की जानकारी दी। जिसके बाद हम तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और वहां कई लोगों को मृत और घायल पाया।’
उन्होंने बताया, हादसे का शिकार हुए लोग उत्तर-पश्चिम मुंबई के गोरेगांव से बाहर स्थित एक पारंपरिक ढोल-ताशा (ड्रम और टक्कर) मंडली का हिस्सा थे, जो एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पुणे के पिंपरी-चिंचवाड़ इलाके में गए थे। सभी एक निजी बस से मुंबई लौट रहे थे।
उन्होंने बताया कि चालक ने कथित तौर पर वाहन से नियंत्रण खो दिया और खोपोली पुलिस थाने की सीमा के तहत शिंगरोबा मंदिर के पास वाहन एक खाई में गिर गया।
हादसे में सतीश और उनके भाई स्वप्निल धूमल की भी मौत हो गई। दोनों शुक्रवार को कार्यक्रम में भाग लेने मुंबई से पुणे के लिए रवाना हुए थे।
भाइयों के दोस्त और पड़ोसी गणेश भोले ने कहा, ‘हम कॉलेज के छात्र हैं और मंडली से जुड़े थे। जब हमें दुर्घटना के बारे में बताया गया तब मैं सो रहा था। हम तुरंत खोपोली पहुंचे और स्वप्निल के शव की पहचान की।’
उन्होंने बताया कि सतीश और स्वप्निल के पिता श्रीधर और उनके परिजन सदमें में हैं और बोलने की स्थिति में नहीं हैं।
पुलिस ने बताया कि हादसे के वक्त बस में ‘बाजी प्रभु प्रचारक समूह’ के 42 सदस्य सवार थे।
घटनास्थल पर मौजूद बचावकर्ताओं में से एक, खोपोली निवासी डॉ रियाज पठान ने बताया कि उन्हें उनके साथी चिकित्सक डॉ शेखर जमाले ने दुर्घटना के बारे जानकारी दी।
पठान ने कहा, ‘मौके पर पहुंचने के बाद, हम 10 से 15 यात्रियों को बाहर निकालने में कामयाब रहे, जिनमें से एक की मौत हो गई।’
उन्होंने दावा किया कि घटनास्थल पर कोई सुरक्षा रेलिंग नहीं थी, यदि रेलिंग होती तो दुर्घटना टल सकती थी।
भाषा साजन पवनेश
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