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Thursday, 26 March, 2026
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थल सेना उप-प्रमुख ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन की वकालत की

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उधमपुर (जम्मू-कश्मीर), सात मई (भाषा) थल सेना उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बी. एस. राजू ने शनिवार को कहा कि भारतीय सेना ने रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी रक्षा निर्माताओं के साथ 40,000 करोड़ रुपये के करार पर हस्ताक्षर किए हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल राजू ने सैन्य कमांडरों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अब से ‘आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन)’ केवल स्वदेशी रक्षा निर्माताओं को दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि ‘ऊपर से’ (शीर्ष नेतृत्व) से दिया गया निर्देश बहुत ही स्पष्ट है कि देश को भविष्य का युद्ध स्वदेशी उपकरणों के साथ लड़ना है।

रक्षा मंत्रालय खरीद प्रक्रिया की शुरुआत में एक विशेष हथियार प्रणाली या उपकरण के लिए एओएन को मंजूरी प्रदान करता है। यह देश में रक्षा निर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के समर्थन का हिस्सा है, जो अभी शुरुआती चरण में है।

‘नॉर्थ टेक’ संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए, लेफ्टिनेंट जनरल राजू ने कहा, ‘‘भारतीय सेना ने पिछले दो वर्षों के दौरान स्वदेशी रक्षा उद्योग के साथ 40,000 करोड़ रुपये के करार किए हैं।’’

उद्योग के समर्थन में उप-प्रमुख ने कहा, ‘‘आपके पास कुछ अनुभव है। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि हम आपकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए (अपनी ओर से) आधी से अधिक दूरी तय करेंगे। हम आपको वे सभी सुविधाएं देंगे जो आवश्यक हैं, चाहे वह उपकरण हो या परीक्षण रेंज या अपना समय।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम आपसे चांद नहीं मांगेंगे। यह तार्किक होगा, ताकि हम उत्पादन कर सकें। अगर आपके उपकरण हमारी आकांक्षाओं की पूर्ति 80 प्रतिशत तक कर सकते हैं, तो हम आपको (उत्पादन का) ऑर्डर देने जा रहे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं।’’

संगोष्ठी के दूसरे दिन, एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें सूक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) सहित भारतीय रक्षा उद्योग की 162 कंपनियों ने हिस्सा लिया और अपने उत्पाद प्रदर्शित किये।

एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि इसके अलावा, सैन्य प्रतिष्ठानों द्वारा अपनी युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए 42 अभिनव साधन भी प्रदर्शित किए गए।

एक प्रवक्ता ने कहा कि संगोष्ठी के पहले दिन, सेना और रक्षा निर्माण उद्योग के प्रतिभागियों ने अन्य बातों के अलावा, भारतीय सेना, डीआरडीओ और डीपीएसयू द्वारा त्वरित खरीद एवं रक्षा पहल में आत्मनिर्भरता के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं पर चर्चा की।

भाषा सुरेश पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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