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Wednesday, 22 April, 2026
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केरल में विषाक्त भोजन के मामले सामने आने के बाद लोग बरत रहे सावधानी, प्रशासन कर रहा कार्रवाई

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(हैरी एम. पिल्लै)

तिरुवनंतपुरम, 15 मई (भाषा) केरल को गत वर्ष विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के मौके पर राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था, लेकिन हाल में राज्य के विभिन्न हिस्सों में विषाक्त भोजन के संदिग्ध मामले सामने आने के बाद यह चिंता का विषय बन गया है।

किसी रेस्तरां में खाते हुए या ऐप के माध्यम से भोजन मंगाने पर लोगों के शरीर में शिगेला, साल्मोनेला या ई. कोलाई में से कोई भी बैक्टीरिया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा सूचकांक में दूसरा स्थान प्राप्त करने के बावजूद, कासरगोड में विषाक्त भोजन की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से किये गए निरीक्षण में पाया गया कि राज्यभर में एक हजार से ज्यादा भोजनालयों के पास लाइसेंस नहीं है या वे पंजीकृत नहीं हैं और उनके भंडार में सैकड़ों किलोग्राम अस्वच्छ मीट पाया गया।

इससे यह सवाल पैदा होता है कि अतीत में इस तरह के निरीक्षण क्यों नहीं किये गए। अगर पहले ही जांच की गई होती तो कासरगोड की घटना को टाला जा सकता था, जहां ‘शावर्मा’ खाने के बाद 16 साल के देवानंद की मौत हो गई और 58 अन्य बीमार पड़ गए।

स्वास्थ्य अधिकारियों को बाद में पता चला कि खाने में शिगेला और साल्मोनेला बैक्टीरिया मौजूद था। शावर्मा लेवांत का एक पकवान है जिसमें मसाले मिले हुए मेमने, चिकन या गाय के मांस के पतले बारीक कटे टुकड़ों को ब्रेड में लगाया जाता है। पीटीआई-भाषा ने जब राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज से पूछा कि क्या इसी तरह नियमित जांच पहले से भी होती रहती तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था, इस पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

पथानामथिट्टा में बैंक में काम करने वाली पेशेवर अश्वनी एस. एल. ने पीटीआई-भाषा से कहा कि उन्होंने हाल में कोल्लम के एक जानेमाने होटल में एक शाकाहारी पकवान खाया था जिसके बाद वह बीमार पड़ गईं और उन्हें 3-4 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।

उन्होंने कहा, “मैं पहले बाहर का खाना खाती थी, लेकिन अब मैं इससे डरती हूं।” ऐसा ही अनुभव कोच्चि के एक बैंककर्मी बिनु शंकर का भी था जो एक महीने पहले मुन्नार के एक भोजनालय में विषाक्त खाना खाने से बीमार पड़ गए थे। कोच्चि की एक गृहिणी सुधा पहले बाहर खाना खाने खूब जाती थीं लेकिन अब वह प्रतिष्ठित होटलों में ही जाना पसंद करती हैं।

केरल होटल एंड रेस्तरां संघ (केएचआरए) का मानना है कि खराब और विषाक्त खाने के लिए सड़क किनारे लगने वाले भोजनालय जिम्मेदार हैं, जिनके पास लाइसेंस है वे नहीं। केएचआरए के महासचिव के पी बालकृष्ण पोडुवल ने पीटीआई-भाषा से कहा, “हमारे सदस्यों द्वारा चलाये जा होटल लाइसेंसी हैं इसलिए उन्हें स्वच्छ भोजन देना पड़ता है अन्यथा उनका लाइसेंस चला जाएगा। लेकिन सड़क किनारे लगने वाले ढाबों या बिना लाइसेंस के चल रहे भोजनालयों को इसकी परवाह नहीं होती।”

दुनियाभर में डायरिया के लिए जहां शिगेला बैक्टीरिया जिम्मेदार है वहीं, साल्मोनेला एक सामान्य तौर पर पाई जाने वाली आंतों की बीमारी है। कासरगोड में 58 मरीजों की जांच में शिगेला पाया गया था, जिसके बाद प्रशासन ने इसके प्रसार को रोकने के लिए कमर कस ली है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस घटना के बाद से केरल सरकार ने 13 मई तक राज्यभर में 2,857 निरीक्षण किये हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि बिना लाइसेंस और पंजीकरण वाली 263 दुकानों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, 962 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किये गये और 367 किलोग्राम अस्वच्छ मांस जब्त कर नष्ट कर दिया गया।

भाषा यश सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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